बढ़नी में स्मैक और नशीले इंजेक्शनों का खुला खेल: धंधेबाजों की गिरफ्त में युवा पीढ़ी, ढेबरुआ पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

ढेबरुआ थाना क्षेत्र के कस्बाई और ग्रामीण इलाकों में स्मैक, प्रतिबंधित नारकोटिक्स और नशीले इंजेक्शनों का अवैध कारोबार बेखौफ जारी है। इस गोरखधंधे की गिरफ्त में आकर क्षेत्र की युवा पीढ़ी गर्त में जा रही है। भारत-नेपाल सीमा से सटे इस संवेदनशील इलाके में स्थानीय पुलिस के साथ-साथ तमाम सुरक्षा एजेंसियां और खुफिया तंत्र मौजूद हैं, इसके बावजूद नशे की यह खेप धड़ल्ले से खप रही है जो सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
एक तरफ जहां क्षेत्राधिकारी शोहरतगढ़ मयंक द्विवेदी अवैध नशे के नेटवर्क को ध्वस्त करने को लेकर लगातार गंभीर रुख अपनाए हुए हैं, वहीं ढेबरुआ थाना पुलिस की लचर कार्यशैली के चलते स्थानीय धंधेबाजों के हौसले पूरी तरह बुलंद हैं। सीओ मयंक द्विवेदी ने अपराध और नशे के सौदागरों पर नकेल कसने के लिए कई बैठकों में कड़े निर्देश जारी किए हैं। ड्रग्स सिंडिकेट की रीढ़ तोड़ने और स्थानीय स्तर पर सघन गश्त के साथ छापेमारी को लेकर उनके इस सख्त रुख और प्रयासों की जनता भी सराहना कर रही है।
इसके ठीक उलट, ढेबरुआ थाना पुलिस इन कड़े निर्देशों को जमीन पर उतारने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। स्थानीय पुलिस की उदासीनता और कथित अनदेखी का ही नतीजा है कि जेल जा चुका एक पुराना शातिर कारोबारी क्षेत्र में बेखौफ होकर अपना सिंडिकेट चला रहा है। सुनसान रास्तों और चिन्हित ठिकानों पर स्मैक व नशीले इंजेक्शनों की आपूर्ति बेरोक-टोक हो रही है। स्कूली छात्रों और युवाओं को पहले लत लगाई जाती है और फिर उनसे मनमाने दाम वसूले जाते हैं। नशे का खर्च जुटाने के लिए युवा अब चोरी और छिनैती जैसी घटनाओं को अंजाम देने लगे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कस्बे और आसपास के इलाकों में नशे के इन अवैध कारोबारियों की गतिविधियां जगजाहिर हैं, लेकिन ढेबरुआ पुलिस की सुस्ती समझ से परे है। लोगों ने सवाल उठाया है कि जब उच्चाधिकारी नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहे हैं, तो ढेबरुआ पुलिस इन पर शिकंजा कसने से क्यों कतरा रही है? क्षेत्रवासियों ने पुलिस अधीक्षक और सीओ शोहरतगढ़ से ढेबरुआ पुलिस की भूमिका की समीक्षा करते हुए स्पेशल टीम के जरिए इन नशे के सौदागरों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की मांग की है।
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