अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान, विज्ञान के क्षेत्र में बढ़ाया देश व प्रदेश का गौरव
SIDHARTHNAGAR NEWS: जनपद के लिए गौरव की बात है कि रफी मेमोरियल इंटर कॉलेज, चकचई से शिक्षा प्राप्त डॉ. इमरान अहमद ने वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए वर्ष 2025 की साइरैंक ग्लोबल रजिस्ट्री में विश्व के शीर्ष 5 प्रतिशत वैज्ञानिकों में स्थान प्राप्त किया है। यह प्रतिष्ठित रैंकिंग वैज्ञानिक उत्पादकता, शोध की गुणवत्ता, उद्धरण प्रभाव तथा वैश्विक शोध प्रभाव के स्वतंत्र मूल्यांकन के आधार पर जारी की जाती है। डॉ. अहमद के अब तक 30 से अधिक शोध-पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। डॉ. अहमद का शोध कार्य जैव-चिकित्सा विज्ञान, आणविक चिकित्सा, सूक्ष्मजीव विज्ञान, संक्रामक रोग एवं ट्रांसलेशनल हेल्थ रिसर्च जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में केंद्रित रहा है, जहां उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्हें अपने वैज्ञानिक जीवन में अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं। इनमें किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ द्वारा ‘एमिनेंट यंग रिसर्चर अवार्ड’ (2023), भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग द्वारा ‘यंग साइंटिस्ट फेलोशिप’ (2020–2023), इंडियन एकेडमी ऑफ बायोमेडिकल साइंसेज का ‘यंग इन्वेस्टिगेटर गोल्ड मेडल’ (2021) प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त अमेरिकन सोसाइटी फॉर माइक्रोबायोलॉजी के वर्ल्ड माइक्रोब फोरम में ‘बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ट्रैवल अवार्ड’ (2021) तथा यूरोपियन मॉलिक्यूलर बायोलॉजी ऑर्गनाइजेशन का इंटरनेशनल ट्रैवल ग्रांट (2022) भी उन्हें प्राप्त हो चुका है। शोध कार्यों के अतिरिक्त डॉ. इमरान अहमद वैज्ञानिक प्रशिक्षण, अकादमिक गतिविधियों एवं शोध संचार में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और युवाओं को विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। अपनी इस उपलब्धि पर डॉ. इमरान अहमद ने कहा, ‘यह सम्मान मेरे परिवार, शिक्षकों, मार्गदर्शकों एवं सहयोगियों के विश्वास और समर्थन का परिणाम है। मैं विज्ञान, नवाचार और समाजोपयोगी शोध के माध्यम से ज्ञान के विस्तार के लिए निरंतर कार्य करता रहूंगा।’ इस उपलब्धि पर रफी मेमोरियल इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य अहमद फरीद अब्बासी ने भी हर्ष व्यक्त करते हुए डॉ. इमरान अहमद को बधाई दी और कहा कि उनकी सफलता से विद्यालय की शान बढ़ी है तथा यह अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक है। विशेषज्ञों के अनुसार, विश्व के शीर्ष 5 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल होना न केवल डॉ. अहमद की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भारतीय वैज्ञानिकों की वैश्विक स्तर पर बढ़ती भागीदारी और प्रभाव का भी प्रमाण है।







