Home उत्तर प्रदेश डीएम का आदेश फेल या नाजिर का खेल?

डीएम का आदेश फेल या नाजिर का खेल?

ट्रांसफर के बाद भी चुनार तहसील की कुर्सी पर कायम राजेंद्र मौर्य
राजस्व अभिलेखागार मिर्जापुर में तैनाती के बावजूद नहीं दिया योगदान
MIRZAPUR NEWS: (सुनील कुमार गुप्ता) जिले में तबादला आदेशों को लेकर प्रशासनिक सख्ती के दावों के बीच चुनार तहसील का एक मामला चर्चा का केंद्र बन गया है। आरोप है कि चुनार तहसील में नाजिर पद पर तैनात राजेंद्र प्रसाद मौर्य का स्थानांतरण लगभग 18 दिन पूर्व व्यवस्था लिपिक, राजस्व अभिलेखागार मिर्जापुर के पद पर किया गया था, लेकिन आदेश जारी होने के बाद भी वह आज तक अपनी पुरानी कुर्सी नहीं छोड़ पाए हैं। इस मामले ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि जिलाधिकारी के आदेशों की प्रभावशीलता को भी कटघरे में ला खड़ा किया है। सूत्रों के अनुसार स्थानांतरण सूची जारी होने के बाद अधिकांश कर्मचारियों ने अपनी नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण कर लिया, लेकिन राजेंद्र प्रसाद मौर्य अब भी चुनार तहसील में नाजिर पद पर बने हुए हैं।तहसील परिसर में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। कर्मचारी वर्ग से लेकर आम लोगों तक के बीच एक ही सवाल गूंज रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में ट्रांसफर आदेश के बावजूद कर्मचारी पुरानी तैनाती पर जमे हुए हैं?जानकारों का कहना है कि नाजिर का पद तहसील प्रशासन का बेहद महत्वपूर्ण पद माना जाता है। तहसील की व्यवस्थाओं, अभिलेखों और विभिन्न प्रशासनिक कार्यों से जुड़े इस पद पर लंबे समय तक बने रहने को लेकर पहले से भी चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में तबादले के बाद भी कुर्सी न छोड़ने की खबर ने कई नए सवालों को जन्म दे दिया है।
डीएम के आदेश से ऊपर कौन?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिलाधिकारी के आदेश पर जिले भर में तबादले किए गए, तो फिर इस मामले में आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ?क्या संबंधित अधिकारी कार्यमुक्ति आदेश जारी करने में असफल रहे? क्या किसी प्रभावशाली संरक्षण के चलते मामला दबा हुआ है? या फिर चुनार तहसील में डीएम के आदेशों से भी ऊपर कोई “अदृश्य ताकत” काम कर रही है? इन सवालों के जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं हैं, लेकिन चर्चाएं जरूर तेज हैं।
तहसील में चर्चा—आखिर इतनी मेहरबानी क्यों?
तहसील परिसर में यह भी चर्चा है कि यदि जिलाधिकारी के आदेश के बावजूद कोई कर्मचारी 18 दिन तक अपनी पुरानी तैनाती पर बना रह सकता है, तो इससे प्रशासनिक अनुशासन और शासन की मंशा पर क्या संदेश जाएगा? सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या स्थानांतरण आदेश केवल कागजों तक सीमित हैं या फिर उनका पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी भी किसी की है?
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में संज्ञान लेकर अपने आदेशों की गरिमा बचाने के लिए ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला भी चर्चाओं तक ही सीमित रह जाएगा।
ट्रांसफर हुआ, लेकिन कुर्सी नहीं हिली
प्रशासनिक नियम कहते हैं कि स्थानांतरण आदेश के बाद कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर नई तैनाती पर भेजा जाता है। कई बार तो एक-दो दिन की देरी पर भी अधिकारियों से जवाब-तलब हो जाता है। लेकिन चुनार तहसील में मामला बिल्कुल उल्टा नजर आ रहा है।18 दिन बीत जाने के बाद भी राजेंद्र प्रसाद मौर्य के कार्यमुक्त न होने की चर्चा अब सिर्फ तहसील तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक गलियारों में भी यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।