ज्वाला देवी सिविल लाइन्स में नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग शुरू
PRAYAGRAJ NEWS: ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में आयोजित 15 दिवसीय ’नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग’’ के छठे दिन का शुभारंभ पारंपरिक वंदना सत्र के साथ आज हुआ। अत्यंत गरिमामयी और ऊर्जावान वातावरण में आयोजित इस प्रशिक्षण वर्ग में शिक्षा जगत की राष्ट्रीय व क्षेत्रीय विभूतियों का मार्गदर्शन नवचयनित आचार्यों को प्राप्त हो रहा है। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय थे। कार्यक्रम की परंपरा के अनुरूप शुरुआत में सिरवारा मार्ग के प्रधानाचार्य युगल किशोर मिश्र ने मुख्य वक्ता डॉ. सौरभ मालवीय सहित सभी नवागत अतिथियों का स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्रम तथा श्रीफल भेंट कर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। वंदना सत्र के उपरांत मुख्य वक्ता डॉ. सौरभ मालवीय का मार्गदर्शन प्रशिक्षणार्थियों को प्राप्त हुआ। उन्होंने भारतीय ज्ञान परम्परा विषय पर बेहद प्रेरक एवं विचारोत्तेजक मार्गदर्शन प्रदान करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा केवल किताबी शिक्षा या जीविकोपार्जन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन को संस्कारित करने वाली एक समग्र और संपूर्ण दृष्टि है। यही वह दृष्टि है जो मनुष्य में मानवता, कर्तव्यबोध, राष्ट्रचेतना एवं वसुधैव कुटुम्बकम के माध्यम से विश्वकल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने नवचयनित आचार्यों से आह्वान किया कि वह शिक्षा को केवल सूचनाएं या जानकारी बांटने तक सीमित ना रखें, बल्कि इसे बालक के भीतर संस्कार, संवेदना और सुदृढ़ चरित्र निर्माण का सशक्त माध्यम बनाएं। भारतीय संस्कृति, वेद-उपनिषद के शाश्वत चिंतन, गुरु – शिष्य परम्परा तथा राष्ट्रनिष्ठ शिक्षा व्यवस्था को वर्तमान समय की महती आवश्यकता बताते हुए उन्होंने आचार्यों को विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व निर्माण के लिए पूर्णतः समर्पित भाव से कार्य करने की प्रेरणा दी। प्रशिक्षण के अगले दो महत्वपूर्ण सत्रों में नवचयनित आचार्य बंधु व भगिनियों को विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री डॉ. राम मनोहर का मार्ग दर्शन प्राप्त हुआ। डॉ. राम मनोहर ने दैनिक जीवन और विद्यालयीन पद्धति में रची बसी ’’सरस्वती वन्दना’’ एवं ’’संघ प्रार्थना’’ (नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे) की शब्दशः व वृहद आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक व्याख्या की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार इन प्रार्थनाओं का एक-एक शब्द आचार्यों और विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान, अजेय शक्ति और उत्तम चरित्र का निर्माण करता है।
उल्लेखनीय है कि 15 दिनों तक चलने वाले आवासीय प्रशिक्षण वर्ग में नवचयनित आचार्यों को शिक्षा जगत के विभिन्न शीर्ष विद्वानों और विषय विशेषज्ञों द्वारा निरंतर प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशिक्षण को सर्वांगीण और प्रभावी बनाने के लिए प्रतिदिन चार विशेष सत्रों की अनूठी रूपरेखा तैयार की गई है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल है। वैचारिक सत्र’’ शिक्षा के मूल उद्देश्यों, राष्ट्रनिष्ठा और विद्या भारती की वैचारिक पृष्ठभूमि पर गंभीर विमर्श। शैक्षिक सत्र’’ आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, तकनीकी कौशल और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा। ’’क्रियात्मक सत्र’’ व्यावहारिक शिक्षण कौशल, कक्षा-कक्ष अनुशासन और सुदृढ़ विद्यालय प्रबंधन का सजीव प्रशिक्षण। ’चर्चात्मक सत्र’’ परस्पर संवाद और समूह चर्चा के माध्यम से शिक्षण के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और उनके रचनात्मक समाधानों का अन्वेषण। इस वृहद प्रशिक्षण वर्ग का मुख्य उद्देश्य आचार्यों को कुशल, संस्कारी, अध्यात्मनिष्ठ और आधुनिक युग की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना है ताकि वे आने वाली पीढ़ी को गढ़कर राष्ट्र निर्माण में अपनी महती भूमिका निभा सकें। इस अवसर पर विद्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारी, प्रबंध समिति के सम्मानीय सदस्य, प्रधानाचार्यगण और भारी संख्या में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे नवचयनित आचार्य बंधु व भगिनी उपस्थित रहे।







