विद्युत स्टोर में पासवर्ड का खेल, योगेन्द्र की ID से आउटसोर्सिंग कर्मी चला रहा सिस्टम 🔵गोरखपुर में बैठकर पडरौना-देवरिया स्टोर का संचालन, IT एक्ट के तहत जांच की मांग
कुशीनगर। पडरौना विद्युत उपकेन्द्र के स्टोर संचालन को लेकर विवाद अब साइबर अपराध और विभागीय मिलीभगत के गंभीर आरोपों तक पहुंच गया है। आरोप है कि आउटसोर्सिंग कर्मचारी अमित सिंह विभागीय स्टोर इंचार्ज योगेन्द्र कुमार गुप्ता की अधिकृत यूजर आईडी और पासवर्ड से अवैध तरीके से स्टोर का संचालन कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार योगेन्द्र गुप्ता गोरखपुर में बैठकर पडरौना और देवरिया विद्युत स्टोर का सिस्टम चला रहे हैं, जबकि फील्ड में उनकी ID का इस्तेमाल अमित सिंह कर रहे हैं। सरकारी वित्तीय नियमों में स्टोर की अभिरक्षा, प्राप्ति, निर्गमन और अभिलेख की जिम्मेदारी तय है, ऐसे में किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा अधिकारी की ID इस्तेमाल करना गंभीर मामला है।
स्टोर का हिसाब खोलेगा राज
नियमों के मुताबिक स्टोर की कस्टडी जिस व्यक्ति को दी जाती है, उससे सुरक्षा की जिम्मेदारी ली जाती है। सवाल यह है कि योगेन्द्र गुप्ता की ID से होने वाली ऑनलाइन प्रविष्टि, सामग्री निर्गमन और स्टॉक में बदलाव की जिम्मेदारी किसकी होगी? इसकी सच्चाई सिर्फ सर्वर लॉग, लॉगिन हिस्ट्री, IP एड्रेस और डिवाइस विवरण की तकनीकी जांच से ही सामने आ सकती है। यूपीपीसीएल की साइबर सुरक्षा गाइडलाइन में भी मजबूत पासवर्ड और यूजर प्रोफाइल की सुरक्षा पर जोर दिया गया है।
साइबर अपराध की श्रेणी में मामला
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66-C के तहत किसी अन्य व्यक्ति के पासवर्ड या डिजिटल पहचान का धोखाधड़ी से इस्तेमाल पहचान की चोरी माना जाता है, जिसमें तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। धारा 43 और 66 भी बिना अनुमति कंप्यूटर संसाधन तक पहुंच को दंडनीय बनाती है। हालांकि यह जांच का विषय है कि पासवर्ड साझा करना अधिकृत था या नहीं और किसके आदेश पर हुआ।
अब मांग उठ रही है कि इस मामले की कागजी जांच नहीं, बल्कि डिजिटल फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए और योगेन्द्र गुप्ता और अमित सिंह दोनों की भूमिका की निष्पक्ष जांच
🔵साइबर अपराध की श्रेणी में मामला
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66-C के तहत किसी अन्य व्यक्ति के पासवर्ड या डिजिटल पहचान का धोखाधड़ी से इस्तेमाल पहचान की चोरी माना जाता है, जिसमें तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। धारा 43 और 66 भी बिना अनुमति कंप्यूटर संसाधन तक पहुंच को दंडनीय बनाती है। हालांकि यह जांच का विषय है कि पासवर्ड साझा करना अधिकृत था या नहीं और किसके आदेश पर हुआ।
अब मांग उठ रही है कि इस मामले की कागजी जांच नहीं, बल्कि डिजिटल फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए और योगेन्द्र गुप्ता और अमित सिंह दोनों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66-C के तहत किसी अन्य व्यक्ति के पासवर्ड या डिजिटल पहचान का धोखाधड़ी से इस्तेमाल पहचान की चोरी माना जाता है, जिसमें तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। धारा 43 और 66 भी बिना अनुमति कंप्यूटर संसाधन तक पहुंच को दंडनीय बनाती है। हालांकि यह जांच का विषय है कि पासवर्ड साझा करना अधिकृत था या नहीं और किसके आदेश पर हुआ।
अब मांग उठ रही है कि इस मामले की कागजी जांच नहीं, बल्कि डिजिटल फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए और योगेन्द्र गुप्ता और अमित सिंह दोनों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो।