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तकनीकी निगरानी के नाम पर ‘ठेकेदारी’! डीसी निर्माण के दबंगई से प्रधानाध्यापक परेशान

🔴 डीसी निर्माण बने ठेकेदार : प्रधानाध्यापकों पर दबाव, निलंबन की धमकी

🔴 संविदाकर्मी के आगे विभाग बेबस! डीसी निर्माण पर अपने कारखासो से भवन बनवाने और प्रधानाध्यापकों को धमकाने के गंभीर आरोप

प्रातः काल एक्सप्रेस
ब्यूरो कुशीनगर....
कुशीनगर। जिस कंधे पर विद्यालय निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी की जिम्मेदारी हो, वही कंधा अगर ठेकेदार की भूमिका मे निर्माण की पूरी कमान अपने हाथ में लेने लगे तो सवाल उठना लाजिमी है। कुशीनगर के बेसिक शिक्षा विभाग में डीसी निर्माण गौरव पाण्डेय का हाल कुछ यही है। शिक्षकों का आरोप है कि संविदा पर तैनात डीसी निर्माण प्रधानाध्यापकों पर अपने कारखास लोगों से विद्यालय निर्माण कराने का दबाव बनाते हैं और बात न मानने पर प्रधानाध्यापको निलंबन करने की धमकी देते हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या डीसी निर्माण को विद्यालय बनवाने का अधिकार है क्या एक संविदाकर्मी को किसी प्रधानाध्यापको को निलंबित करने का अधिकार है? अगर नही तो फिर इस तरह की धमकी क्यो?

बेशक! मामला अति गंभीर है मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि शासन की गाइडलाइन में निर्माण कार्य की व्यवस्था स्पष्ट है। संविदाकर्मी डीसी निर्माण की भूमिका तकनीकी पर्यवेक्षण की है, जबकि विद्यालय निर्माण के क्रियान्वयन के लिए विद्यालय प्रबंध समिति की उपसमिति निर्धारित की गई है। ऐसे में सवाल यह है कि तकनीकी निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाला कर्मचारी आखिर निर्माण कराने अथवा निर्माणकर्ता तय करने की स्थिति में कैसे पहुंच गया?

🔴 गाइडलाइन में ‘तकनीकी निगरानी’, जमीन पर ‘धमकी’

शासन के निर्देश में निर्माण कार्य के विभिन्न चरणों के तकनीकी पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी जिला समन्वयक निर्माण को दी गई है। वहीं निर्माण कार्य के लिए विद्यालय प्रबंध समिति की उपसमिति गठित करने और निर्धारित प्रक्रिया से निर्माण कराने की व्यवस्था है।
यानी डीसी निर्माण का काम निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों को देखना है, न कि खुद ठेकेदार बनकर निर्माण कराना या फिर अपनी पसंद का निर्माणकर्ता रखना।अगर आरोप सही हैं तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तकनीकी पर्यवेक्षण की आड़ में निर्माण पर नियंत्रण स्थापित किया जा रहा है?

🔴 ‘निलंबित करा दूंगा’ संविदाकर्मी को किसने दिया यह अधिकार ?
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