Uttar Pradesh
स्ववित्तपोषित शिक्षकों ने किया कैशलेस चिकित्सा का बहिष्कार, मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
वाराणसी। अनुदानित महाविद्यालय स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ (AMSSA) के तत्वावधान में चल रहे प्रदेशव्यापी कैशलेस चिकित्सा बहिष्कार के क्रम में वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से संबंध अनुदानित महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षकों ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा का बहिष्कार करते हुए जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। जिला अधिकारी के प्रतिनिधि के रूप में उप जिलाधिकारी ने ज्ञापन लिया।
शिक्षकों ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पिछले लगभग 25 वर्षों से चली आ रही दोहरी व्यवस्था को समाप्त करने की मांग की। उनका कहना है कि स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में कार्यरत अनुमोदित शिक्षक लंबे समय से सेवा संबंधी असुरक्षा और उचित मानदेय की समस्या का सामना कर रहे हैं। शिक्षकों ने स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों को अनुदान पर लेकर उनमें कार्यरत शिक्षकों को विनियमित किए जाने की मांग उठाई।
शिक्षकों ने कहा कि उच्च शिक्षा में एकरूपता स्थापित करने तथा विद्यार्थियों को कम शुल्क में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए इस व्यवस्था में आवश्यक सुधार किया जाना चाहिए। ज्ञापन में शिक्षकों ने उचित मानदेय और सेवा-सुरक्षा की मांग भी प्रमुखता से उठाई।
वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज, श्री अग्रसेन कन्या पीजी कॉलेज, हरिश्चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय तथा कालिका धाम स्नातकोत्तर महाविद्यालय के स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षकों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
इस अवसर पर प्रदेश संगठन की महामंत्री डॉ. अंजना सिंह सहित विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। डॉ. रुचि त्रिपाठी, डॉ. शालिनी श्रीवास्तव, डॉ. कविता सिंह, डॉ. दिव्या राय, डॉ. सुमन, डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव, डॉ. आराधना, डॉ. एकता रंजन, डॉ. अंजू श्रीवास्तव, डॉ. रुचि सिंह, डॉ. अनुज श्रीवास्तव, डॉ. अजय राय, डॉ. अजय सिंह, डॉ. बृजेश द्विवेदी, डॉ. विनोद कुमार सिंह, डॉ. बद्री विशाल पांडेय, डॉ. शशिकांत सिंह, डॉ. विपिन प्रकाश सिंह, डॉ. रंजन श्रीवास्तव एवं डॉ. लालेंद्र सिंह सहित अनेक शिक्षक उपस्थित रहे।
प्रमुख मांगें -स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षकों का विनियमितीकरण। -स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों को अनुदान पर लिया जाना। -शिक्षकों को उचित मानदेय एवं सेवा-सुरक्षा प्रदान करना।
-उच्च शिक्षा में चली आ रही दोहरी व्यवस्था को समाप्त करना।
-विद्यार्थियों को कम शुल्क में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कदम उठाना।
-शिक्षकों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि उनकी लंबे समय से लंबित समस्याओं पर शीघ्र निर्णय लेते हुए स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षकों के लिए स्थायी एवं सम्मानजनक सेवा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।