सरस्वती हाईटेक सिटी के 100 आवंटियों को सुविधा नहीं, आक्रोश पेनाल्टी और ब्याज लगाने पर भडके, कहा कि 10 वर्ष से इंतजार, अब और नहीं
प्रयागराज। नैनी स्थित यूपीसीडा की सरस्वती हाई-टेक सिटी में अध्यक्ष डॉ. प्रभाकर त्रिपाठी की अध्यक्षता में निवासियों की आज बैठक हुई, जिसमें 100 से अधिक निवासी और आवंटी शामिल हुए। बैठक में उत्तम मिश्रा ने निवासियों की समस्याओं और माँगों का बिंदुवार एजेंडा प्रस्तुत किया, जिस पर सभी ने खुलकर अपनी बात रखी। बैठक में लोगों का गुस्सा और दर्द साफ दिखाई दिया। निवासियों ने एक स्वर में कहा कि टाउनशिप को बसे 10 साल हो गए, लेकिन आज भी पानी, सीवर, बिजली, सड़क, सफाई और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएँ पूरी नहीं हुई हैं।
बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा आवंटियों पर लगाई जा रही पेनल्टी और ब्याज का रहा। अनुपम सिंह ने कहा कि जब यूपीसीडा ने खुद अपना वादा समय से पूरा नहीं किया, तो निर्माण में देरी का दोष आवंटियों पर कैसे डाला जा सकता है? बिना सीवर, पानी और बिजली के कोई अपना घर कैसे बनाए? एक आवंटी ने भावुक होकर कहा, ष्हमने अपनी जीवन भर की कमाई लगाकर यहाँ प्लॉट लिया था, एक सपने के साथ। आज दस साल बाद सुविधाएँ नहीं, ऊपर से हर महीने पेनल्टी का नोटिस आता है। यह हमारे साथ अन्याय है।
मलबा शुल्क को लेकर भी निवासियों में भारी नाराजगी दिखी। एक आवंटी ने सवाल उठाया, ष्जब मलबा गिराने का शुल्क आवंटन के समय ही ले लिया गया था, तो अब मकान बनवाते समय उसी के लिए दोबारा पैसे की माँग क्यों की जा रही है? एक ही काम के लिए दो बार वसूली कहाँ का न्याय है ? निवासियों ने बताया कि यूपीसीडा की अपनी वेबसाइट पर पुलिस स्टेशन, फायर स्टेशन, अस्पताल, सीवरेज, स्ट्रीटलाइट और 24 घंटे बिजली को ष्उपलब्ध सुविधाएँष् बताया गया है, जबकि जमीन पर इनमें से कुछ भी नहीं है। ष्जो लिखित वादा किया गया था, बस वही पूरा कर दीजिए कृ हम इससे ज्यादा कुछ नहीं मांग रहे है।
बैठक में फैक्ट्रियों में रखी गैसों और रसायनों से सुरक्षा का मुद्दा भी गंभीरता से उठा। निवासियों ने पूछा कि किसी रिसाव की स्थिति में कॉलोनी तक चेतावनी कैसे पहुँचेगी, और माँग की कि आपात योजना सार्वजनिक की जाए तथा निवासियों के साथ साल में कम से कम एक बार मॉक ड्रिल हो। बी ब्लॉक में करीब 20 फीट गहरे खुले गड्ढे पर भी चिंता जताई गई, जिसमें कभी भी कोई हादसा हो सकता है। इसके अलावा टूटी सड़कें, जलभराव, खराब बिजली बॉक्स, बंद स्ट्रीटलाइट, कूड़ा उठान, बिसलेरी प्लांट से आने वाली बदबू, आवासीय सड़कों पर खड़े ट्रक, रात में पुलिस गश्त का अभाव, तथा फायर स्टेशन और अस्पताल न होने जैसे मुद्दे भी उठाए गए।
निवासियों की प्रमुख मांग है किआवंटियों पर लगी पेनल्टी तुरंत खत्म की जाए और जारी नोटिस वापस लिए जाएँय अब तक वसूला गया ब्याज व पेनल्टी लौटाई जाए या आगे की किस्तों में समायोजित की जाएय जब तक सभी सुविधाएँ पूरी न हों, कोई नई पेनल्टी या ब्याज न लगाने का लिखित आदेश जारी होय मलबा शुल्क की दोबारा माँग बंद की जाएय सीवर लाइन और एसटीपी चालू करने की ब्लॉक-वार तारीख़ घोषित होय पीने के पानी की नियमित आपूर्ति, स्ट्रीटलाइट और सड़कों की मरम्मत तुरंत होय बी ब्लॉक के गड्ढे पर 7 दिन में बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगेंय पुलिस चैकी, फायर स्टेशन और अस्पताल के लिए ठोस समय-सीमा तय हो।
निवासियों ने कहा कि पहले बुनियादी सुविधाएँ, फिर गोल्फ कोर्स।ष् उन्होंने माँग की कि ये सभी मुद्दे 7 अक्टूबर को होने वाली यूपीसीडा बोर्ड बैठक के एजेंडा में शामिल किए जाएँ और हर मुद्दे पर लिखित जवाब, जिम्मेदार अधिकारी का नाम और समय-सीमा तय की जाए। निवासियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो वह अपनी आवाज और मजबूती से उठाएँगे।
बैठक में अध्यक्ष डॉ. प्रभाकर त्रिपाठी, सचिव अशोक कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष अजय राज सिंह, उपसचिव चंद्रशेखर कुशवाहा, डॉ. विजय प्रकाश त्यागी, अनुपम सिंह, उत्तम मिश्रा सहित बड़ी संख्या में निवासी, महिलाएँ और बुजुर्ग उपस्थित रहे।
बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा आवंटियों पर लगाई जा रही पेनल्टी और ब्याज का रहा। अनुपम सिंह ने कहा कि जब यूपीसीडा ने खुद अपना वादा समय से पूरा नहीं किया, तो निर्माण में देरी का दोष आवंटियों पर कैसे डाला जा सकता है? बिना सीवर, पानी और बिजली के कोई अपना घर कैसे बनाए? एक आवंटी ने भावुक होकर कहा, ष्हमने अपनी जीवन भर की कमाई लगाकर यहाँ प्लॉट लिया था, एक सपने के साथ। आज दस साल बाद सुविधाएँ नहीं, ऊपर से हर महीने पेनल्टी का नोटिस आता है। यह हमारे साथ अन्याय है।
मलबा शुल्क को लेकर भी निवासियों में भारी नाराजगी दिखी। एक आवंटी ने सवाल उठाया, ष्जब मलबा गिराने का शुल्क आवंटन के समय ही ले लिया गया था, तो अब मकान बनवाते समय उसी के लिए दोबारा पैसे की माँग क्यों की जा रही है? एक ही काम के लिए दो बार वसूली कहाँ का न्याय है ? निवासियों ने बताया कि यूपीसीडा की अपनी वेबसाइट पर पुलिस स्टेशन, फायर स्टेशन, अस्पताल, सीवरेज, स्ट्रीटलाइट और 24 घंटे बिजली को ष्उपलब्ध सुविधाएँष् बताया गया है, जबकि जमीन पर इनमें से कुछ भी नहीं है। ष्जो लिखित वादा किया गया था, बस वही पूरा कर दीजिए कृ हम इससे ज्यादा कुछ नहीं मांग रहे है।
बैठक में फैक्ट्रियों में रखी गैसों और रसायनों से सुरक्षा का मुद्दा भी गंभीरता से उठा। निवासियों ने पूछा कि किसी रिसाव की स्थिति में कॉलोनी तक चेतावनी कैसे पहुँचेगी, और माँग की कि आपात योजना सार्वजनिक की जाए तथा निवासियों के साथ साल में कम से कम एक बार मॉक ड्रिल हो। बी ब्लॉक में करीब 20 फीट गहरे खुले गड्ढे पर भी चिंता जताई गई, जिसमें कभी भी कोई हादसा हो सकता है। इसके अलावा टूटी सड़कें, जलभराव, खराब बिजली बॉक्स, बंद स्ट्रीटलाइट, कूड़ा उठान, बिसलेरी प्लांट से आने वाली बदबू, आवासीय सड़कों पर खड़े ट्रक, रात में पुलिस गश्त का अभाव, तथा फायर स्टेशन और अस्पताल न होने जैसे मुद्दे भी उठाए गए।
निवासियों की प्रमुख मांग है किआवंटियों पर लगी पेनल्टी तुरंत खत्म की जाए और जारी नोटिस वापस लिए जाएँय अब तक वसूला गया ब्याज व पेनल्टी लौटाई जाए या आगे की किस्तों में समायोजित की जाएय जब तक सभी सुविधाएँ पूरी न हों, कोई नई पेनल्टी या ब्याज न लगाने का लिखित आदेश जारी होय मलबा शुल्क की दोबारा माँग बंद की जाएय सीवर लाइन और एसटीपी चालू करने की ब्लॉक-वार तारीख़ घोषित होय पीने के पानी की नियमित आपूर्ति, स्ट्रीटलाइट और सड़कों की मरम्मत तुरंत होय बी ब्लॉक के गड्ढे पर 7 दिन में बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगेंय पुलिस चैकी, फायर स्टेशन और अस्पताल के लिए ठोस समय-सीमा तय हो।
निवासियों ने कहा कि पहले बुनियादी सुविधाएँ, फिर गोल्फ कोर्स।ष् उन्होंने माँग की कि ये सभी मुद्दे 7 अक्टूबर को होने वाली यूपीसीडा बोर्ड बैठक के एजेंडा में शामिल किए जाएँ और हर मुद्दे पर लिखित जवाब, जिम्मेदार अधिकारी का नाम और समय-सीमा तय की जाए। निवासियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो वह अपनी आवाज और मजबूती से उठाएँगे।
बैठक में अध्यक्ष डॉ. प्रभाकर त्रिपाठी, सचिव अशोक कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष अजय राज सिंह, उपसचिव चंद्रशेखर कुशवाहा, डॉ. विजय प्रकाश त्यागी, अनुपम सिंह, उत्तम मिश्रा सहित बड़ी संख्या में निवासी, महिलाएँ और बुजुर्ग उपस्थित रहे।