रुक्मिणी हरण से शिशुपाल वध तक , डॉ चंद्रमणि त्रिपाठी ने सुनाई कथा
वाराणसी। बड़ागांव क्षेत्र के अंतर्गत खटौरा गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन कथा व्यास डॉ. चंद्रमणि त्रिपाठी (पूर्व प्राचार्य, व्याकरणाचार्य) ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा में रुक्मिणी हरण एवं विवाह, जाम्बवती, सत्यभामा, कालिन्दी एवं सत्या से विवाह, 16108 बंदी राजकुमारियों से विवाह तथा शिशुपाल वध के प्रसंग सुनाए गए। इसके साथ ही त्रिदेव द्वारा भक्त परीक्षा, स्यमन्तकोपाख्यान, यदुवंश को विप्र श्राप एवं भगवान श्रीकृष्ण की लीला-विहार का विस्तार से वर्णन किया गया। प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए और कथा स्थल भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। डॉ. चंद्रमणि त्रिपाठी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं मानव जीवन को धर्म, भक्ति, सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। इस अवसर पर चंदेश्वर नारायण सिंह,मंजू सिंह,सुषमासिंह, राजेश्वर सिंह,नागेश्वर सिंह, बिजेश्वर सिंह, जितेंद्र सिंह,हेमंत सिंह, हर्षित सिंह,किशन सिंह, गिरीश सिंह, धनंजय सिंह, शांति भूषण सिंह, शशिभूषण सिंह आदि लोग मौजूद थे।