पितृपक्ष में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, पिंडदान को गया रवाना
मऊआइमा। पितृपक्ष में पूर्वजों के पिंडदान के लिए श्रद्धालु गया, बोधगया और जगन्नाथपुरी के लिए रवाना हुए। रवाना होने से पहले परिजनों और ग्रामीणों ने उन्हें विदा कर मंगलमय यात्रा की कामना की।
मऊआइमा के चकश्याम गांव से रामसुंदर पांडेय पितरों के श्राद्ध और पिंडदान के लिए रवाना हुए। वे गया, बोधगया और जगन्नाथपुरी में धार्मिक अनुष्ठान करेंगे। परिजनों ने बताया कि पिंडदान पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। बदलती जीवनशैली में ऐसी परंपराएं नई पीढ़ी को परिवार की जड़ों और संस्कारों से जोड़ने का माध्यम भी बनती हैं।
परिजनों का कहना है कि बुजुर्गों और दिवंगत पूर्वजों के प्रति सम्मान की भावना परिवार की पीढ़ियों को आपस में जोड़ती है। पितृपक्ष इसी भाव को आगे बढ़ाने का अवसर देता है।
इस मौके पर रमेश चंद्र पाण्डेय, दिनेश पाण्डेय, रोहित पांडेय, अमित पांडेय, अजित पांडेय, आशीष, शिव बाबू गुप्ता, राम दुलार, अनिल पटेल समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
मऊआइमा के चकश्याम गांव से रामसुंदर पांडेय पितरों के श्राद्ध और पिंडदान के लिए रवाना हुए। वे गया, बोधगया और जगन्नाथपुरी में धार्मिक अनुष्ठान करेंगे। परिजनों ने बताया कि पिंडदान पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। बदलती जीवनशैली में ऐसी परंपराएं नई पीढ़ी को परिवार की जड़ों और संस्कारों से जोड़ने का माध्यम भी बनती हैं।
परिजनों का कहना है कि बुजुर्गों और दिवंगत पूर्वजों के प्रति सम्मान की भावना परिवार की पीढ़ियों को आपस में जोड़ती है। पितृपक्ष इसी भाव को आगे बढ़ाने का अवसर देता है।
इस मौके पर रमेश चंद्र पाण्डेय, दिनेश पाण्डेय, रोहित पांडेय, अमित पांडेय, अजित पांडेय, आशीष, शिव बाबू गुप्ता, राम दुलार, अनिल पटेल समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।