नवरात्रि पर भक्ति के साथ नारी सशक्तिकरण का संदेश, नित्यानंद जी महाराज ने बताई नवदुर्गा की महिमा सप्तमी पर कन्या पूजन, सिलाई सेंटर का उद्घाटन और पुस्तक लोकार्पण का कार्यक्रम प्रस्तावित
वाराणसी। नवरात्रि के पावन पर्व पर देवी आराधना के साथ नारी सशक्तिकरण और महिला स्वावलंबन का संदेश दिया जा रहा है। वार्ड नंबर 39, वृंदावन, सुसुवाही स्थित श्री नित्य निकुंज रस सेवा संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष नित्यानंद जी महाराज ने नवदुर्गा के नौ स्वरूपों की महिमा बताते हुए मातृशक्ति के सम्मान और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि मां शैलपुत्री से मां सिद्धिदात्री तक देवी के नौ स्वरूप श्रद्धा, तपस्या, साहस, शक्ति, मातृत्व, विजय और सिद्धि के प्रतीक हैं। नवरात्रि केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, सेवा और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का अवसर भी है।नित्यानंद जी महाराज ने बताया कि नवरात्रि की सप्तमी पर भव्य देवी पूजन एवं कन्या पूजन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसी अवसर पर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जनप्रतिनिधियों द्वारा सिलाई सेंटर का उद्घाटन भी प्रस्तावित है। इसके माध्यम से महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।कार्यक्रम में ‘सेवा से साधना, मानवता राघव से’ पुस्तक का लोकार्पण भी प्रस्तावित है। महाराज ने कहा कि जरूरतमंदों की सेवा, मानवता का सम्मान और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना ही सच्चे अर्थों में मातृशक्ति की आराधना है।
उन्होंने कहा कि मां शैलपुत्री से मां सिद्धिदात्री तक देवी के नौ स्वरूप श्रद्धा, तपस्या, साहस, शक्ति, मातृत्व, विजय और सिद्धि के प्रतीक हैं। नवरात्रि केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, सेवा और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का अवसर भी है।नित्यानंद जी महाराज ने बताया कि नवरात्रि की सप्तमी पर भव्य देवी पूजन एवं कन्या पूजन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसी अवसर पर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जनप्रतिनिधियों द्वारा सिलाई सेंटर का उद्घाटन भी प्रस्तावित है। इसके माध्यम से महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।कार्यक्रम में ‘सेवा से साधना, मानवता राघव से’ पुस्तक का लोकार्पण भी प्रस्तावित है। महाराज ने कहा कि जरूरतमंदों की सेवा, मानवता का सम्मान और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना ही सच्चे अर्थों में मातृशक्ति की आराधना है।