Uttar Pradesh
नारी के रूप मोह में फंसकर दरोगा को असमय गंवानी पड़ी अपनी जान
मिर्जापुर। बड़ा विचित्र होता है, नारी का रूप मोह। बुद्धि व विवेक रहते हुए भी इंसान पराई नारी के रूप मोह में फंस जाता है और वासना के गहरे गड्ढे में गिरकर नरक के कीड़े के समान बिलबिलाने लगता है। कुछ लोग इसमें अपनी जान भी गंवा बैठते हैं।
जैसे एक पतंगा दूसरे पतंगे को जलकर भस्म होते देखता है किंतु इतना प्रत्यक्ष ज्ञान भी उसे लौ के रूप मोह से बचा नहीं पाता। कुछ इसी तरह बस्ती जनपद में तैनात एक होनहार दरोगा सूर्यप्रकाश सिंह को एक पराई नारी के रूप मोह में फंसकर असमय ही अपनी जान गंवानी पड़ गई। मूल रूप से वे आजमगढ़ जनपद के अतरौलिया थाने के भीलमपुर छपरा के निवासी थे। उनका शव बस्ती कलेक्ट्रेट स्थित उनके सरकारी आवास में फंदे से लटका मिला था। उनके मोबाइल की जांच से वाल्टरगंज के गंधार निवासी प्रियंका चौधरी का नाम प्रकाश में आया।
उल्लेखनीय है कि सूर्यप्रकाश सिंह वाल्टरगंज थाने के प्रभारी भी रह चुके थे। प्रियंका चौधरी ने उन्हें अपने रूप जाल में फंसा लिया और उन्हें दुधारू गाय की तरह दुहने लगी। बाद में प्रियंका की महत्वाकांक्षा और अधिक बढ़ी तब उसने दरोगा के साथ बिताए अपने अंतरंग पलों का वीडियो दिखाकर उनसे करोड़ों रुपये मांगने लगी। न देने पर वीडियो वायरल कर देने की धमकी देने लगी। उनके पास जो कुछ था, उसे तो वह पहले ही दुह चुकी थी। अब वह करोड़ों मांग रही थी। ऐसे में बदनामी के डर से दरोगा को फांसी पर लटककर हंसती-खेलती अपनी जीवन लीला समाप्त करनी पड़ी।
मोबाइल जांच से प्रियंका के पिता रामनयन चौधरी व पैकोलिया क्षेत्र के पिपरा काजी गांव के अधिवक्ता विजय प्रकाश की भूमिका ब्लैकमेलिंग में पाए जाने पर दोनों को जेल भेज दिया गया है। यह घटना समाज को सीख देती है कि यदि आप घर-परिवार से दूर हैं तो आप अपने बुद्धि व विवेक का इस्तेमाल करें, अपना चाल, चरित्र और चेहरा मजबूत रखें तथा पर-नारी के रूप मोह से बचें। वरना लोक-लाज के भय से फांसी पर तो लटकना ही पड़ेगा।