जीवांश कार्बन बढ़ाने, मिट्टी की सेहत सुधारने और टिकाऊ खेती को अपनाये ष् डा.मनोज
कौशाम्बी। खेतों की उर्वरता बचाने, मृदा स्वास्थ्य में सुधार लाने और कृषि को अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने के उद्देश्य से 22 अक्टूबर से 30 नवंबर, 2026 तक चलने वाले खेत बचाओ अभियान का शुभारंभ कृषि विज्ञान केंद्र, कौशांबी की ओर से विकासखंड नेवादा के ग्राम गोविंदपुर में किया गया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री माननीय शिवराज सिंह चैहान के निर्देशानुसार आयोजित इस अभियान के तहत किसानों को मृदा संरक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती और कृषि भूमि की गुणवत्ता बनाए रखने के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने कहा कि खेत केवल फसल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि किसान की आजीविका और भविष्य की नींव हैं। मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने मृदा में जीवांश कार्बन एवं जीवांश पदार्थ की मात्रा बढ़ाने के लिए वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद, फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन तथा जैविक खादों के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ने से उसकी संरचना, जल धारण क्षमता और पोषक तत्वों की उपलब्धता में सुधार होता है, जिससे फसलों की उत्पादकता और मृदा स्वास्थ्य दोनों को लाभ मिलता है।
केंद्र के प्रसार वैज्ञानिक डॉ. अमित केशरी ने किसानों को मृदा परीक्षण के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मिट्टी की जांच के आधार पर ही खेत में आवश्यक पोषक तत्वों की सही मात्रा निर्धारित की जा सकती है। इससे उर्वरकों का संतुलित उपयोग संभव होता है और खेती की लागत कम करने में मदद मिलती है। उन्होंने जैविक एवं प्राकृतिक खेती के विभिन्न घटकों, उनके उपयोग और कृषि उत्पादन में उनकी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए किसानों से मिट्टी की सेहत को प्राथमिकता देने की अपील की।
उद्यान वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र प्रताप सिंह ने किसानों को उद्यानिकी फसलों की संभावनाओं, वैज्ञानिक बागवानी और पौध उत्पादन की तकनीकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से पपीते की स्वस्थ एवं गुणवत्तायुक्त पौध तैयार करने के लिए नर्सरी प्रबंधन, पौधों की देखभाल और आवश्यक सावधानियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से उद्यानिकी अपनाकर किसान अपनी आय के स्रोतों में विविधता ला सकते हैं।
इस अवसर पर प्रगतिशील किसान उदय सिंह ने जैविक खेती की दिशा में अपने अनुभव और अब तक के सफर को साझा किया। उन्होंने जैविक खेती अपनाने के दौरान मिले अनुभवों तथा प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के महत्व पर चर्चा की और किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को संदेश दिया गया कि स्वस्थ मिट्टी ही स्वस्थ फसल, बेहतर उत्पादन और समृद्ध किसान का आधार है। खेतों में जैविक पदार्थों की वृद्धि, संतुलित पोषण, मृदा परीक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण अपनाकर कृषि भूमि की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है। खेत बचाओ अभियान का उद्देश्य भी किसानों को जागरूक कर मिट्टी की सेहत सुधारने और आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ खेतों की विरासत सुरक्षित रखने की दिशा में प्रेरित करना है।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने कहा कि खेत केवल फसल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि किसान की आजीविका और भविष्य की नींव हैं। मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने मृदा में जीवांश कार्बन एवं जीवांश पदार्थ की मात्रा बढ़ाने के लिए वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद, फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन तथा जैविक खादों के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ने से उसकी संरचना, जल धारण क्षमता और पोषक तत्वों की उपलब्धता में सुधार होता है, जिससे फसलों की उत्पादकता और मृदा स्वास्थ्य दोनों को लाभ मिलता है।
केंद्र के प्रसार वैज्ञानिक डॉ. अमित केशरी ने किसानों को मृदा परीक्षण के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मिट्टी की जांच के आधार पर ही खेत में आवश्यक पोषक तत्वों की सही मात्रा निर्धारित की जा सकती है। इससे उर्वरकों का संतुलित उपयोग संभव होता है और खेती की लागत कम करने में मदद मिलती है। उन्होंने जैविक एवं प्राकृतिक खेती के विभिन्न घटकों, उनके उपयोग और कृषि उत्पादन में उनकी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए किसानों से मिट्टी की सेहत को प्राथमिकता देने की अपील की।
उद्यान वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र प्रताप सिंह ने किसानों को उद्यानिकी फसलों की संभावनाओं, वैज्ञानिक बागवानी और पौध उत्पादन की तकनीकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से पपीते की स्वस्थ एवं गुणवत्तायुक्त पौध तैयार करने के लिए नर्सरी प्रबंधन, पौधों की देखभाल और आवश्यक सावधानियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से उद्यानिकी अपनाकर किसान अपनी आय के स्रोतों में विविधता ला सकते हैं।
इस अवसर पर प्रगतिशील किसान उदय सिंह ने जैविक खेती की दिशा में अपने अनुभव और अब तक के सफर को साझा किया। उन्होंने जैविक खेती अपनाने के दौरान मिले अनुभवों तथा प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के महत्व पर चर्चा की और किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को संदेश दिया गया कि स्वस्थ मिट्टी ही स्वस्थ फसल, बेहतर उत्पादन और समृद्ध किसान का आधार है। खेतों में जैविक पदार्थों की वृद्धि, संतुलित पोषण, मृदा परीक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण अपनाकर कृषि भूमि की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है। खेत बचाओ अभियान का उद्देश्य भी किसानों को जागरूक कर मिट्टी की सेहत सुधारने और आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ खेतों की विरासत सुरक्षित रखने की दिशा में प्रेरित करना है।