चार साल बाद अपने परिवार से मिलीं 70 वर्षीय शिवपतिया, वृद्धाश्रम प्रबंधक आलोक राय ने परिजनों से मिलवाकर घर भेजा
कौशाम्बी
अपनों से बिछड़ने का दर्द क्या होता है, यह वही समझ सकता है जिसने लंबे समय तक अपने परिवार से दूर रहकर जिंदगी गुजारी हो। कौशांबी में मानवता और संवेदनशीलता की एक भावुक मिसाल सामने आई, जब 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला शिवपतिया को चार साल बाद उनके परिजनों से मिलवाकर घर भेजा गया।
चार साल तक परिवार से दूर रहने वाली शिवपतिया के लिए अपनों से दोबारा मिलना किसी सपने के सच होने जैसा था। उम्र के इस पड़ाव पर जब इंसान को सबसे ज्यादा अपनों के सहारे, प्यार और देखभाल की जरूरत होती है, तब परिवार से दूर रहना बेहद पीड़ादायक होता है।वृद्धाश्रम प्रबंधक आलोक राय ने 70 वर्षीय शिवपतिया को उनके परिजनों से मिलवाने की पहल की। प्रयास सफल हुआ और चार साल बाद शिवपतिया को अपने परिवार के साथ घर लौटने का अवसर मिला। यह मिलन केवल एक बुजुर्ग महिला की घर वापसी नहीं, बल्कि रिश्तों की अहमियत और इंसानियत की जीत का भावुक क्षण था। शिवपतिया की घर वापसी ने यह संदेश दिया कि सच्ची समाजसेवा केवल जरूरतमंदों की मदद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बिछड़े अपनों को मिलाना भी मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। इस स उम्र में हर बुजुर्ग को अपने परिवार का प्यार, सम्मान और सहारा मिलना चाहिए। जिन हाथों ने कभी अपने बच्चों को संभाला, जिन कंधों ने परिवार की जिम्मेदारियां उठाईं, उन हाथों को बुढ़ापे में अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।वृद्धाश्रम प्रबंधक आलोक राय की इस पहल ने एक बार फिर साबित किया कि सेवा का असली अर्थ किसी के चेहरे पर मुस्कान लौटाना और अपनों से बिछड़े इंसान को उसके परिवार तक पहुंचाना है।
“बुजुर्गों को दया नहीं, सम्मान चाहिए। उन्हें अकेलापन नहीं, अपनों का साथ चाहिए।”