भक्ति और आध्यात्मिकता के संदेश के साथ श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन
वाराणसी। बड़ागांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत खटौरा गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण में भव्य समापन हुआ। कथा व्यास डॉ. चंद्रमणि त्रिपाठी (पूर्व प्राचार्य, व्याकरणाचार्य) ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से लेकर राजा परीक्षित के मोक्ष तक के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथा में भगवान श्रीकृष्ण की पत्नियों के स्वयंविवाह, यदुवंश पर विप्र श्राप, यदुवंश का अंत, राजा परीक्षित के मृत्यु-भय एवं उसके निवारण, परीक्षित मोक्ष, जन्मेजय के सर्प यज्ञ तथा नारद मोह-भंग के प्रसंग सुनाए गए। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं से भगवान के नाम का स्मरण करने तथा समाज में प्रेम, भाईचारा और सेवा की भावना को बढ़ाने का आह्वान किया गया। इस अवसर पर श्री बालाजी ग्रुप के चेयरमैन अमित कुमार मिश्रा का विशेष आगमन हुआ। उन्होंने श्रद्धापूर्वक कथा का श्रवण कर व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त किया। अमित कुमार मिश्रा ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली आध्यात्मिक प्रेरणा है। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति मनुष्य को सत्य, प्रेम, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। आज के समय में आध्यात्मिकता और संस्कारों को जीवन में अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
इस दौरान चंदेश्वर नारायण सिंह, मंजू सिंह, सुषमा सिंह, राजेश्वर सिंह, नागेश्वर सिंह, बिजेश्वर सिंह, जितेंद्र सिंह, हेमंत सिंह, किशन सिंह, हर्षित सिंह, गिरीश सिंह, धनंजय सिंह, शांतिभूषण सिंह एवं शशिभूषण सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
कथा में भगवान श्रीकृष्ण की पत्नियों के स्वयंविवाह, यदुवंश पर विप्र श्राप, यदुवंश का अंत, राजा परीक्षित के मृत्यु-भय एवं उसके निवारण, परीक्षित मोक्ष, जन्मेजय के सर्प यज्ञ तथा नारद मोह-भंग के प्रसंग सुनाए गए। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं से भगवान के नाम का स्मरण करने तथा समाज में प्रेम, भाईचारा और सेवा की भावना को बढ़ाने का आह्वान किया गया। इस अवसर पर श्री बालाजी ग्रुप के चेयरमैन अमित कुमार मिश्रा का विशेष आगमन हुआ। उन्होंने श्रद्धापूर्वक कथा का श्रवण कर व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त किया। अमित कुमार मिश्रा ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली आध्यात्मिक प्रेरणा है। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति मनुष्य को सत्य, प्रेम, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। आज के समय में आध्यात्मिकता और संस्कारों को जीवन में अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
इस दौरान चंदेश्वर नारायण सिंह, मंजू सिंह, सुषमा सिंह, राजेश्वर सिंह, नागेश्वर सिंह, बिजेश्वर सिंह, जितेंद्र सिंह, हेमंत सिंह, किशन सिंह, हर्षित सिंह, गिरीश सिंह, धनंजय सिंह, शांतिभूषण सिंह एवं शशिभूषण सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।