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सात मोहर्रम पर बहेरा सादात में निकला हज़रत अब्बास के अलम का भव्य जुलूस

सीजेए प्रदेश अध्यक्ष शहंशाह आब्दी के आवास से उठा अलम, करबला के शहीदों को किया गया याद
FATEHPUR NEWS: थाना सुल्तानपुर घोष क्षेत्र के ग्राम पंचायत बहेरा सादात में सात मोहर्रम के अवसर पर हज़रत अब्बास अलमदार की याद में अकीदत और एहतराम के साथ अलम का भव्य जुलूस निकाला गया। मोहर्रम का महीना शुरू होते ही पूरे क्षेत्र में ग़म और मातम का माहौल है तथा करबला के शहीदों की याद में लगातार मजलिसों का आयोजन किया जा रहा है। सात मोहर्रम के मौके पर गांव के बड़े इमामबाड़े से हज़रत अब्बास का मुबारक अलम उठाया गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए और “या हुसैन” तथा “या अब्बास” की सदाओं के बीच अलम गांव के विभिन्न मार्गों से होकर गुज़रा। श्रद्धालु अलम के नीचे से गुजरकर अपनी मन्नतें मांगते रहे और करबला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश करते रहे। जुलूस गांव का भ्रमण करते हुए तंजीम हुसैन के इमामबाड़े पहुंचा, जहां मजलिस का आयोजन किया गया। इससे पूर्व साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार शहंशाह आब्दी के आवास पर आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए जिला हरदोई के बराही सादात से तशरीफ लाए मौलाना मीर वहेब अब्बास ने करबला की दर्दनाक घटना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लगभग 1400 वर्ष पूर्व 61 हिजरी में इराक के करबला के मैदान में इस्लाम की रक्षा के लिए पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफा (स.अ.व.) के नवासे इमाम हुसैन (अ.स.) ने अपने 72 वफादार साथियों के साथ यज़ीदी फौज के अत्याचारों का डटकर मुकाबला किया था।
मौलाना ने कहा कि यज़ीद अपनी सत्ता को मजबूत करने के लिए इमाम हुसैन से बैअत लेना चाहता था, लेकिन इमाम हुसैन ने अन्याय और अत्याचार के सामने झुकने से इंकार कर दिया। इसके बाद करबला के मैदान में इमाम हुसैन और उनके साथियों को घेर लिया गया तथा तीन दिनों तक फरात नदी का पानी बंद कर दिया गया। भीषण गर्मी और प्यास के बावजूद इमाम हुसैन के काफिले ने सत्य और इंसाफ का दामन नहीं छोड़ा। उन्होंने हज़रत अब्बास अलमदार की शहादत का जिक्र करते हुए बताया कि जब खेमों में मौजूद बच्चों की प्यास असहनीय हो गई तो हज़रत अब्बास पानी लाने के लिए फरात की ओर बढ़े। उन्होंने दुश्मनों का घेरा तोड़कर मश्क में पानी भर लिया, लेकिन वापसी के दौरान दुश्मनों ने उनके दोनों हाथ काट दिए और उन्हें शहीद कर दिया। उन्होंने कहा कि हज़रत अब्बास की शहादत वफादारी, बहादुरी और कुर्बानी की सबसे बड़ी मिसाल है। मौलाना मीर वहेब अब्बास ने कहा कि करबला का पैगाम किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए है। करबला हमें अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने, सत्य का साथ देने और मानवता की रक्षा के लिए हर कुर्बानी देने का संदेश देती है। उन्होंने लोगों से इमाम हुसैन और हज़रत अब्बास की शिक्षाओं पर अमल करने की अपील की। मजलिस के बाद अकीदतमंदों ने मातम कर शोहदा-ए-कर्बला को पुरसा पेश किया तथा मुल्क में अमन, भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष दुआएं कीं। पूरे कार्यक्रम के दौरान ग़म और अकीदत का माहौल बना रहा तथा क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की।