धाता ब्लॉक के खैरई गांव स्थित मुर्गी फार्म के पास काटा गया विशाल आम का पेड़
वृक्षारोपण अभियान के बीच हरियाली बचाने के दावों पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की
FATEHPUR NEWS: एक ओर प्रदेश सरकार ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर फतेहपुर जिले के धाता विकासखंड अंतर्गत खैरई गांव में हरे-भरे आम के पेड़ की कटाई का मामला सामने आने से अभियान की गंभीरता पर सवाल उठने लगे हैं। ये प्रकरण फोटो के साथ सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं। हांलाकि इस मामले में डीएफओ का कहना है कि मामले की जांच करवाकर आवश्यक कार्यवाही की जायेगी। ग्रामीणों के अनुसार खैरई गांव स्थित एक मुर्गी फार्म के पास वर्षों पुराने विशाल आम के हरे पेड़ पर आरी चलाकर उसे काट दिया गया। घटना ऐसे समय सामने आई है जब जिले में वृक्षारोपण महाअभियान की तैयारियां जोरों पर हैं और प्रशासन अधिक से अधिक पौधे लगाने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से हरे-भरे पेड़ों की कटाई का सिलसिला जारी है, लेकिन संबंधित विभाग प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय मूकदर्शक बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई की जाती तो इस तरह खुलेआम पेड़ों की कटाई नहीं होती। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अवैध कटान के मामलों में केवल जुर्माने की औपचारिकता पूरी कर दी जाती है, जबकि वास्तविक दोषियों और कटान कराने वालों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती। इससे लकड़ी माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं। घटना के बाद क्षेत्र में वन विभाग की कार्यशैली को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि जब सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तब हरे-भरे पेड़ों की कटाई शासन की मंशा पर सीधा आघात है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी एवं वन विभाग के उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते अवैध कटान पर रोक नहीं लगाई गई तो क्षेत्र की हरियाली पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।







