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यादें सिर्फ स्मृतियाँ नहीं, हमारी पहचान हैं : डॉ. इशान्या राज
प्रातःकाल एक्सप्रेस
प्रयागराज। विश्व अल्ज़ाइमर दिवस के अवसर पर रविवार को मनोविज्ञान के क्षेत्र में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। हर साल 21 सितंबर को विश्व अल्ज़ाइमर दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम _‘यादें सिर्फ स्मृतियाँ नहीं, यह हमारी पहचान है’_ रखी गई है। क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक (परामर्शदाता) डॉ. इशान्या राज, प्रयागराज ने बताया कि अल्ज़ाइमर एक प्रगतिशील मस्तिष्क विकार है, जो धीरे-धीरे बढ़ता है। यह याददाश्त, सोचने की क्षमता, व्यवहार और दैनिक गतिविधियों को प्रभावित करता है और डिमेंशिया का सबसे सामान्य कारण है। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ भूलने की बीमारी नहीं है। इसके लक्षणों में हाल की याददाश्त में कमी, सोचने-योजना बनाने में कठिनाई, भाषा में परेशानी, चिड़चिड़ापन-उदासी और दैनिक कार्य करने में कठिनाई शामिल हैं।
विश्व में लगभग 55 मिलियन लोग अल्ज़ाइमर से पीड़ित हैं, जो 2030 तक 78 मिलियन और 2050 तक 139 मिलियन होने का अनुमान है। भारत में वर्ष 2023 में 87 लाख लोग डिमेंशिया से पीड़ित थे। 60 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 10 में से 1 व्यक्ति अल्ज़ाइमर का शिकार है।
65 वर्ष से अधिक आयु, परिवार में अल्ज़ाइमर का इतिहास, हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा व कम शारीरिक-मानसिक सक्रियता वालों में जोखिम अधिक है।
डॉ. ईशान्या राज ने कहा कि समय पर पहचान से इसकी गति धीमी की जा सकती है। बचाव के लिए पहेलियाँ हल करना, संगीत सुनना, नई चीजें सीखना, लेखन, नियमित व्यायाम, योग, संतुलित आहार, पूरी नींद और धूम्रपान से दूरी जरूरी है। देखभाल करने वालों को धैर्य, गरिमा बनाए रखना और खुद के लिए समय निकालना चाहिए।
उन्होंने संदेश दिया अल्ज़ाइमर सिर्फ एक बीमारी नहीं, यह एक यात्रा है जिसमें सहानुभूति, समझ और साथ की जरूरत है। जागरूकता ही बेहतर कल है।
प्रयागराज। विश्व अल्ज़ाइमर दिवस के अवसर पर रविवार को मनोविज्ञान के क्षेत्र में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। हर साल 21 सितंबर को विश्व अल्ज़ाइमर दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम _‘यादें सिर्फ स्मृतियाँ नहीं, यह हमारी पहचान है’_ रखी गई है। क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक (परामर्शदाता) डॉ. इशान्या राज, प्रयागराज ने बताया कि अल्ज़ाइमर एक प्रगतिशील मस्तिष्क विकार है, जो धीरे-धीरे बढ़ता है। यह याददाश्त, सोचने की क्षमता, व्यवहार और दैनिक गतिविधियों को प्रभावित करता है और डिमेंशिया का सबसे सामान्य कारण है। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ भूलने की बीमारी नहीं है। इसके लक्षणों में हाल की याददाश्त में कमी, सोचने-योजना बनाने में कठिनाई, भाषा में परेशानी, चिड़चिड़ापन-उदासी और दैनिक कार्य करने में कठिनाई शामिल हैं।
विश्व में लगभग 55 मिलियन लोग अल्ज़ाइमर से पीड़ित हैं, जो 2030 तक 78 मिलियन और 2050 तक 139 मिलियन होने का अनुमान है। भारत में वर्ष 2023 में 87 लाख लोग डिमेंशिया से पीड़ित थे। 60 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 10 में से 1 व्यक्ति अल्ज़ाइमर का शिकार है।
65 वर्ष से अधिक आयु, परिवार में अल्ज़ाइमर का इतिहास, हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा व कम शारीरिक-मानसिक सक्रियता वालों में जोखिम अधिक है।
डॉ. ईशान्या राज ने कहा कि समय पर पहचान से इसकी गति धीमी की जा सकती है। बचाव के लिए पहेलियाँ हल करना, संगीत सुनना, नई चीजें सीखना, लेखन, नियमित व्यायाम, योग, संतुलित आहार, पूरी नींद और धूम्रपान से दूरी जरूरी है। देखभाल करने वालों को धैर्य, गरिमा बनाए रखना और खुद के लिए समय निकालना चाहिए।
उन्होंने संदेश दिया अल्ज़ाइमर सिर्फ एक बीमारी नहीं, यह एक यात्रा है जिसमें सहानुभूति, समझ और साथ की जरूरत है। जागरूकता ही बेहतर कल है।