जानवरों के काटने पर तुरंत कराएं इलाज, झाड़-फूंक से बचें: बढ़नी पीएचसी पर विश्व रेबीज दिवस पर लोगों को किया गया जागरूक

बढ़नी (सिद्धार्थनगर): प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बढ़नी में सोमवार को विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने उपस्थित लोगों को रेबीज के लक्षण, बचाव के उपायों और समय पर चिकित्सीय उपचार के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि कुत्ते, बिल्ली, बंदर जैसे संक्रमित जानवरों के काटने या खरोंचने से रेबीज का संक्रमण फैल सकता है। रेबीज एक बेहद गंभीर और जानलेवा वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से संक्रमित जानवर की लार के जरिए मानव शरीर में प्रवेश करती है। इससे बचाव के लिए आवश्यक है कि जानवर के काटने के तुरंत बाद घाव को बहते पानी और साबुन से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं। इसके उपरांत बिना किसी देरी के नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सक से परामर्श लें और एंटी-रेबीज वैक्सीन तथा आवश्यकतानुसार एंटी-रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन लगवाएं। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को आगाह किया गया कि जानवर के काटने पर किसी भी प्रकार के घरेलू नुस्खे, मिर्ची-चूना लगाने या झाड़-फूंक के चक्कर में कतई न पड़ें, क्योंकि थोड़ी सी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। इसके अतिरिक्त पालतू कुत्तों और बिल्लियों का समय पर अनिवार्य टीकाकरण कराने की अपील भी की गई। स्वास्थ्य विभाग का मुख्य उद्देश्य व्यापक जन-जागरूकता और शत-प्रतिशत टीकाकरण के माध्यम से रेबीज से होने वाली मौतों को पूरी तरह रोकना है। यह जागरूकता कार्यक्रम प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अविनाश चौधरी के नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस अवसर पर डॉ. सरवन चौधरी, फार्मासिस्ट रामसहाय वर्मा, स्टाफ नर्स अमृता पाण्डेय, सौम्या, मेहजबीन, शेहला, खुशबू, कुलदीप, रामभवन, विजय कुमार,जितेन्द्र, आशीष सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी और आम नागरिक उपस्थित रहे।
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