विश्व खाद्य दिवस पर कृषि विश्वविद्यालय में सजी खाद्य प्रदर्शनी कुलपति बोले—खाद्य विरासत का संरक्षण भावी पीढ़ियों के लिए जरूरी, सीडीओ ने भोजन की बर्बादी रोकने का किया आह्वान
झांसी। विश्व खाद्य दिवस-2026 के अवसर पर रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में खाद्य पदार्थों, पारंपरिक व्यंजनों, पोस्टरों और रंगोली की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई। “आज नवाचार करें, कल पोषण दें” संदेश के साथ आयोजित कार्यक्रम में बुंदेलखंडी व्यंजनों, श्रीअन्न (मिलेट्स) से बने पौष्टिक खाद्य पदार्थों और विभिन्न राज्यों के पारंपरिक पकवानों को प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि भारत की खाद्य एवं पोषण संबंधी विरासत अत्यंत समृद्ध है। इसे संरक्षित कर भावी पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है। ऐसे आयोजन खाद्य विविधता, पोषण और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं।
मुख्य अतिथि सीडीओ रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड ने कहा कि अन्न का प्रत्येक दाना अमूल्य है। किसान बीज बोने से लेकर फसल तैयार करने तक कठिन परिश्रम करता है, इसलिए खाद्यान्न का उचित भंडारण और संरक्षण जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जितनी आवश्यकता हो, उतना ही भोजन पकाएं और थाली में उतना ही लें, जितना खा सकें। भोजन की बर्बादी रोकना सभी की जिम्मेदारी है।
प्रदर्शनी में श्रीअन्न उत्कृष्टता केंद्र की ओर से ज्वार के रसगुल्ले, ज्वार का चूड़ा, रागी के समोसे, सामा के लड्डू, रागी की खीर और कुकीज सहित कई पौष्टिक खाद्य पदार्थ प्रस्तुत किए गए। डॉ. अनीता पोयम, डॉ. बीजिलक्ष्मी देवी और डॉ. प्रियंका शर्मा ने मणिपुर के पारंपरिक व्यंजन प्रदर्शित किए। डॉ. गरिमा गुप्ता ने चावल एवं रागी से बना फरहा, जबकि विद्यार्थियों ने हिमाचल प्रदेश, झारखंड और बुंदेलखंड के पारंपरिक व्यंजन प्रस्तुत किए। छात्राओं ने खाद्य सुरक्षा, पोषण और अन्न संरक्षण पर आधारित पोस्टर एवं रंगोली भी बनाई।
पारंपरिक व्यंजन प्रतियोगिता की गृहिणी श्रेणी में डॉ. सुधा वर्मा को धुस्का के लिए प्रथम तथा श्रीमती वंदना महाजन को हिमाचली व्यंजनों के लिए द्वितीय पुरस्कार मिला। संकाय सदस्य श्रेणी में डॉ. गरिमा को फरहा के लिए प्रथम, मणिपुरी व्यंजनों की प्रस्तुति एवं डॉ. प्रियंका शर्मा को सिड्डू के लिए द्वितीय तथा हिमांग्री को बुंदेली बड़ा के लिए तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। विद्यार्थी श्रेणी में वैष्णवी एवं उनकी टीम को झालमुड़ी और श्रीअन्न के रसगुल्ले के लिए प्रथम पुरस्कार मिला। पॉट पेंटिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए श्रेया एवं मुद्रिका को सम्मानित किया गया।
आयोजन समिति में डॉ. घनश्याम अबरोल, डॉ. गुंजन, डॉ. रविंद्र तिवारी, डॉ. हमीद एवं डॉ. गौतमी शामिल रहे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारी, विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।