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उत्तम आकिंचन धर्म का संदेश देता है सरल और संयमित जीवन दिगंबर जैन मंदिर चिलकाना में दशलक्षण पर्व के नौवें दिन धार्मिक आयोजन
प्रातःकाल एक्सप्रेस
चिलकाना। दशलक्षण पर्व के नौवें दिन दिगंबर जैन मंदिर चिलकाना में उत्तम आकिंचन धर्म की आराधना एवं पूजा-अर्चना श्रद्धापूर्वक की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिला, पुरुष एवं बच्चों ने धार्मिक आयोजनों में भाग लेकर धर्मलाभ लिया।
धर्मसभा में पंडित तनिष्क शास्त्री ने उत्तम आकिंचन धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि मन, वचन और कर्म से परिग्रह की भावना समाप्त हो जाना ही आकिंचन धर्म का सार है। ‘मेरा-तेरा’ के भाव का त्याग कर व्यक्ति को आवश्यकता के अनुरूप ही वस्तुओं का ग्रहण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिग्रह से मुक्त जीवन व्यक्ति को लालच, मोह और संग्रह की प्रवृत्ति से दूर कर सरल, संतोषी एवं संयमित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि जीवन में वास्तविक शांति अनावश्यक वस्तुओं के संग्रह में नहीं, बल्कि मोह और आसक्ति के त्याग में है। उत्तम आकिंचन धर्म मनुष्य को अपनी आवश्यकताओं को सीमित कर आत्मिक उन्नति की ओर बढ़ने का संदेश देता है।
रात्रि में अलका जैन द्वारा धार्मिक प्रश्न मंच प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और धर्म एवं जैन दर्शन से जुड़े प्रश्नों के उत्तर दिए। प्रतियोगिता के पश्चात विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए गए।
इस अवसर पर अंकुर जैन द्वारा शांति धारा की गई। सुबह उत्तम आकिंचन धर्म की भव्य पूजा-अर्चना संपन्न हुई। मंदिर परिसर में पूरे दिन धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने भक्ति एवं श्रद्धा के साथ पर्व का आयोजन किया।
चिलकाना। दशलक्षण पर्व के नौवें दिन दिगंबर जैन मंदिर चिलकाना में उत्तम आकिंचन धर्म की आराधना एवं पूजा-अर्चना श्रद्धापूर्वक की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिला, पुरुष एवं बच्चों ने धार्मिक आयोजनों में भाग लेकर धर्मलाभ लिया।
धर्मसभा में पंडित तनिष्क शास्त्री ने उत्तम आकिंचन धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि मन, वचन और कर्म से परिग्रह की भावना समाप्त हो जाना ही आकिंचन धर्म का सार है। ‘मेरा-तेरा’ के भाव का त्याग कर व्यक्ति को आवश्यकता के अनुरूप ही वस्तुओं का ग्रहण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिग्रह से मुक्त जीवन व्यक्ति को लालच, मोह और संग्रह की प्रवृत्ति से दूर कर सरल, संतोषी एवं संयमित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि जीवन में वास्तविक शांति अनावश्यक वस्तुओं के संग्रह में नहीं, बल्कि मोह और आसक्ति के त्याग में है। उत्तम आकिंचन धर्म मनुष्य को अपनी आवश्यकताओं को सीमित कर आत्मिक उन्नति की ओर बढ़ने का संदेश देता है।
रात्रि में अलका जैन द्वारा धार्मिक प्रश्न मंच प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और धर्म एवं जैन दर्शन से जुड़े प्रश्नों के उत्तर दिए। प्रतियोगिता के पश्चात विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए गए।
इस अवसर पर अंकुर जैन द्वारा शांति धारा की गई। सुबह उत्तम आकिंचन धर्म की भव्य पूजा-अर्चना संपन्न हुई। मंदिर परिसर में पूरे दिन धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने भक्ति एवं श्रद्धा के साथ पर्व का आयोजन किया।