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देवरा स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में विशेष करना पूजन एवं भंडारे का आयोजन संपन्न
वाराणसी। पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में सहस्र चंडी महायज्ञ एवं भव्य संत समागम के उपरांत सोमवार को कन्या पूजन, कन्या भोज एवं विशिष्ट साधु-संतों के लिए भंडारे का आयोजन किया गया। धार्मिक अनुष्ठानों के क्रम में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के सानिध्य एवं मार्गदर्शन में कन्याओं का विधिवत पूजन कर उन्हें भोज कराया गया। इसके बाद साधु-संतों एवं श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन हुआ। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि सनातन परंपरा में कन्या को देवी स्वरूप माना गया है। कन्या पूजन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि नारी शक्ति के सम्मान और भारतीय संस्कारों की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों का उद्देश्य समाज में सद्भाव, सेवा, संस्कार और धर्म के प्रति आस्था को मजबूत करना है।
कन्या पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से कन्याओं के चरण पूजन किए तथा उन्हें भोजन कराकर दक्षिणा एवं उपहार प्रदान किए। इसके पश्चात आदि शंकराचार्य महासंस्थानम परिसर में साधु-संतों के लिए विशेष भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न क्षेत्रों से आए साधु-संतों ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ दूर-दराज से पहुंचे भक्त भी शामिल हुए। आयोजन में लगभग पांच हजार श्रद्धालुओं ने दिव्य प्रसाद ग्रहण किया। पूरे परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने महायज्ञ की पूर्णाहुति के बाद आयोजित इस सेवा कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
इस अवसर पर महासंस्थानम से जुड़े संत, विद्वान, यजमान, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सहस्र चंडी महायज्ञ के विभिन्न अनुष्ठानों के उपरांत आयोजित कन्या पूजन, कन्या भोज और संत भंडारे ने धार्मिक आयोजन को सेवा एवं लोककल्याण की भावना से जोड़ा।
कन्या पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से कन्याओं के चरण पूजन किए तथा उन्हें भोजन कराकर दक्षिणा एवं उपहार प्रदान किए। इसके पश्चात आदि शंकराचार्य महासंस्थानम परिसर में साधु-संतों के लिए विशेष भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न क्षेत्रों से आए साधु-संतों ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ दूर-दराज से पहुंचे भक्त भी शामिल हुए। आयोजन में लगभग पांच हजार श्रद्धालुओं ने दिव्य प्रसाद ग्रहण किया। पूरे परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने महायज्ञ की पूर्णाहुति के बाद आयोजित इस सेवा कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
इस अवसर पर महासंस्थानम से जुड़े संत, विद्वान, यजमान, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सहस्र चंडी महायज्ञ के विभिन्न अनुष्ठानों के उपरांत आयोजित कन्या पूजन, कन्या भोज और संत भंडारे ने धार्मिक आयोजन को सेवा एवं लोककल्याण की भावना से जोड़ा।