दौड़े कदम तो बढ़े सपने... वाईडी मैदान में गूंजा खिलाड़ियों का जोश 75वीं जनपदीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता का आगाज, मार्च पास्ट में दिखा अनुशासन,
लखीमपुर खीरी, 07 अक्टूबर। मैदान सजा था, कदमताल शुरू हुई तो माहौल में रोमांच घुल गया। किसी की नजर फिनिश लाइन पर थी तो किसी के कदम जीत की ओर बढ़ रहे थे। युवराज दत्त इंटर कॉलेज का मैदान बुधवार को खिलाड़ियों के जोश, जुनून और जज्बे का गवाह बना। मौका था तीन दिवसीय 75वीं जनपदीय माध्यमिक विद्यालयीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता के शुभारंभ का।
डीएम अंजनी कुमार सिंह ने डीआईओएस विनोद कुमार मिश्र के साथ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। इसके बाद खिलाड़ियों की मार्च पास्ट ने मैदान में अनुशासन और ऊर्जा का रंग भर दिया। डीएम ने मार्च पास्ट की सलामी ली। आसमान में छोड़े गए तिरंगे गुब्बारे शांति और सद्भाव का संदेश देते नजर आए तो लगा मानो खिलाड़ियों के सपनों ने भी आसमान की ओर उड़ान भर ली हो।
जीत से ज्यादा जरूरी उसे बरकरार रखना : डीएम
डीएम अंजनी कुमार सिंह ने खिलाड़ियों से कहा कि प्रतियोगिता में हिस्सा लेना ही अपने आप में उपलब्धि है। खेल बच्चों के शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक विकास की भी मजबूत नींव रखते हैं। उन्होंने कहा कि खेल का मैदान स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, अनुशासन और संघर्ष करना सिखाता है। जीत मिले तो अभिमान नहीं और हार मिले तो प्रतिद्वंद्वी के प्रति ईर्ष्या नहीं होनी चाहिए। असली चुनौती जीत हासिल करने से ज्यादा उसे बरकरार रखने की है।उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि वे पूरे मनोयोग और मेहनत के साथ खेलें और आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और प्रदेश का नाम रोशन करें।
डीएम अंजनी कुमार सिंह ने डीआईओएस विनोद कुमार मिश्र के साथ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। इसके बाद खिलाड़ियों की मार्च पास्ट ने मैदान में अनुशासन और ऊर्जा का रंग भर दिया। डीएम ने मार्च पास्ट की सलामी ली। आसमान में छोड़े गए तिरंगे गुब्बारे शांति और सद्भाव का संदेश देते नजर आए तो लगा मानो खिलाड़ियों के सपनों ने भी आसमान की ओर उड़ान भर ली हो।
जीत से ज्यादा जरूरी उसे बरकरार रखना : डीएम
डीएम अंजनी कुमार सिंह ने खिलाड़ियों से कहा कि प्रतियोगिता में हिस्सा लेना ही अपने आप में उपलब्धि है। खेल बच्चों के शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक विकास की भी मजबूत नींव रखते हैं। उन्होंने कहा कि खेल का मैदान स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, अनुशासन और संघर्ष करना सिखाता है। जीत मिले तो अभिमान नहीं और हार मिले तो प्रतिद्वंद्वी के प्रति ईर्ष्या नहीं होनी चाहिए। असली चुनौती जीत हासिल करने से ज्यादा उसे बरकरार रखने की है।उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि वे पूरे मनोयोग और मेहनत के साथ खेलें और आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और प्रदेश का नाम रोशन करें।