ट्रैक, सिग्नल और फाटकों की संरक्षा परखने गोण्डा-बढ़नी रूट पर उतरे डीआरएम, गेटमैन का लिया इम्तिहान सिग्नल प्रणाली और फाटकों की गहन पड़ताल; बढ़नी में निर्माणाधीन एफओबी का काम जल्द पूरा करने की दी हिदायत
सिद्धार्थनगर: रेल परिचालन को पूरी तरह हादसारहित बनाने और यात्रियों की हिफाजत पुख्ता करने की कवायद के तहत पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मण्डल के मण्डल रेल प्रबन्धक (डीआरएम) गौरव अग्रवाल ने गुरुवार को गोण्डा-बढ़नी रेल खण्ड की संरक्षा व्यवस्था की नब्ज टटोली। स्पेशल ट्रेन से अधिकारियों के दल के साथ पहुंचे डीआरएम ने पूरे रेल खण्ड में पटरियों की स्थिति, स्टेशन यार्ड, सिग्नल प्रणाली, तीखे मोड़ों (कर्व) और पुलों की तकनीकी बारीकियों की गहन पड़ताल की।
निरीक्षण की शुरुआत सुभागपुर स्टेशन से हुई, जहां डीआरएम ने स्टेशन यार्ड में उतरकर प्वाइंट व क्रॉसिंग के लेआउट को परखा और सिग्नलिंग व्यवस्था के संचालन की जमीनी हकीकत जानी। इसके बाद बलरामपुर-गैंजहवा के बीच समपार फाटक संख्या 136 और गैंजहवा-तुलसीपुर के बीच फाटक संख्या 108-बी पर अचानक रुककर उन्होंने व्यवस्थाओं की जांच की। डीआरएम ने फाटकों पर मौजूद बूम लॉकिंग, प्राइवेट नंबर रजिस्टर, सेफ्टी चेन, फॉग सिग्नल (पटाखे) और हैंड टॉर्च जैसे आपातकालीन उपकरणों को खुद चेक किया। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात गेटमैन से अप्रत्याशित परिस्थितियों से निपटने के तौर-तरीकों पर सवाल पूछकर उनके संरक्षा ज्ञान की परीक्षा ली और कुड़िया स्थित पुल संख्या 154 का भी तकनीकी मुआयना किया।
रूट के प्रमुख स्टेशन बढ़नी पहुंचने पर डीआरएम ने स्टेशन अधीक्षक कार्यालय, पैनल रूम, रिले रूम के अलावा सर्कुलेटिंग एरिया और यात्री प्रतीक्षालय का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां निर्माणाधीन फुट ओवरब्रिज (एफओबी) के काम में तेजी लाने के साथ गुणवत्ता से कोई समझौता न करने की सख्त हिदायत दी। वापसी में इटियाथोक स्टेशन की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए उन्होंने अफसरों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ट्रेनों के संचालन में संरक्षा से जुड़ी छोटी सी भी चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस दौरान वरिष्ठ मण्डल परिचालन प्रबन्धक (समन्वय), वरिष्ठ मण्डल इंजीनियर (समन्वय), वरिष्ठ मण्डल संरक्षा अधिकारी, वरिष्ठ मण्डल वाणिज्य प्रबंधक सहित सिगनल, दूरसंचार और विद्युत विभाग के तमाम वरिष्ठ मण्डलीय अधिकारी उपस्थित रहे।