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श्री 1008 श्री चंद्रदेव महाराज का 132 वा जयंती संगीत समारोह हर्षोल्लास के साथ मनाया गया -
वाराणसी। रवीन्द्रपुरी स्थित श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के पूजन सभागार मे श्री श्री 1008 श्रीचंद्रदेवजी महाराज जी की 532वी जयंती के उपलक्ष्य मे आयोजित श्री श्रीचंद्रदेव संगीत समारोह मे गायक वादको ने अपनी संगीताजली अर्पित की। कार्यक्रम के समापन मे श्री पंचायती अखाडा बड़ा उदासीन के मुकाम कोठारी महंत डॉ लक्ष्मण दास ने कलाकारों को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया एवं अपनी मंगल कामनाये व्यक्त की। कार्यक्रम में प्रथम प्रस्तुति रही युवा कलाकार कृष्ण कुमार तिवारी की जिन्होंने प्रथम भजन की भाव पूर्ण प्रस्तुति से विभोर किया जिसके बोल थे गोपाल गोकुल वल्लभी इसके उपरांत सुश्री श्रेया सोनकर द्वारा प्रस्तुत भजन भावपूर्ण रहा जिसके बोल थे साधो परम् धरम सूखदायी। एवं अगले क्रम मे सुश्री आराधना विश्वकर्मा ने अपने भजन से आनंदित किया भजन के बोल थे एसा ही गुरु ध्यावे । अगली प्रस्तुति रही युवा कलाकार सुश्री प्रिया गुप्ता की जिनके भजन के बोल थे कृष्ण कृष्ण नाम जपत मन मोरा प्रिया एवं आराधना के साथ तबला संगति रही। अनंग गुप्ता की एवं संवादिनी पर साथ दिया विष्णु ने इस के उपरांत पद्मश्री पंडित डा. राजेश्वर आचार्य ने अपने गायन से लोगों को भक्ति रस से संतृप्त किया। प्रथम भक्ति रचना के बोल थे ष्अब मोसे छूटे नाही राम रट लागीष् गा कर आपने गायन का समापन किया। सूरदासजी जी की भक्ति रचना ष्हे गोविन्द राखो शरण सेष् तबला संगति रही। श्रीकांत मिश्रा की। संवादिनी पर साथ दिया आपके शिष्य डॉ चारुचंद्र सिंह ने। गायन मे सहभागिता रही आपके पुत्र डॉ प्रीतेशआचार्य एवं डॉ चारुचन्द्र की।कार्यक्रम के समापन मे महंत डॉ लक्ष्मण दास द्वारा अंगवस्त्र तथा माल्यार्पण के माध्यम से पद्मश्री पं राजेश्वर आचार्य जी का सम्मान किया गया।समस्त आयोजन मुकाम कोठारी महंतडॉ लक्ष्मण दास जी के मार्गदर्शन मे सम्पन्न हुए साथ ही कार्यक्रम मे महंत बालेश्वर मुनि जी महंत जोगेंद्र मुनि जी का विशेष मार्गदर्शन रहा। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रो के गणमान्य जनो की समारोह मे उपस्थिति रही। सांगीतिक कार्यक्रम का संयोजन किया गया पीयूष आचार्य द्वारा तथा संचालन डॉ प्रीतेश आचार्य ने किया।