स्नातकों के साथ हुए छलावे का मुद्दा उठा, डॉ. विक्रम पटेल ने शिवशंकर पटेल के समर्थन में किया जनसंपर्क अधिकार, सम्मान और पुरानी पेंशन बहाली जैसे मुद्दों पर स्नातक मतदाताओं से किया संवाद
झांसी। इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी प्रत्याशी शिवशंकर पटेल के समर्थन में डॉ. विक्रम पटेल ने जनसंपर्क कर स्नातक मतदाताओं से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने स्नातक वर्ग की समस्याओं, अधिकारों और प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि लंबे समय से स्नातक मतदाता अपनी समस्याओं के समाधान और अधिकारों की प्रभावी पैरवी की अपेक्षा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कई मामलों में निराशा का सामना करना पड़ा है।
डॉ. विक्रम पटेल ने कहा कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि निर्वाचित प्रतिनिधि की जिम्मेदारी है कि वह शिक्षित बेरोजगारों, युवाओं, शिक्षकों और कर्मचारियों की समस्याओं को सदन में उठाए। स्नातकों के साथ पूर्व में हुए कथित छलावे और उनकी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरने के मुद्दे पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अब समय है कि स्नातक वर्ग अपने अधिकारों, रोजगार और भविष्य से जुड़े सवालों पर गंभीरता से विचार करे।
उन्होंने पुरानी पेंशन बहाली, संविदा एवं आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के हितों और शिक्षित युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इन विषयों पर लगातार आवाज उठाने और संबंधित मंचों पर पैरवी करने की आवश्यकता है। जनसंपर्क के दौरान मतदाताओं से संवाद स्थापित कर शिवशंकर पटेल की उम्मीदवारी और उनके द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर चर्चा की गई।
शिवशंकर पटेल के समर्थन में जुटे लोगों ने कहा कि स्नातक निर्वाचन केवल एक चुनाव नहीं, बल्कि शिक्षित वर्ग के अधिकारों, रोजगार, पुरानी पेंशन बहाली और संविदा एवं आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की समस्याओं से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है। स्नातकों को अपने प्रतिनिधि से जवाबदेही और निरंतर सक्रियता की अपेक्षा है। इसी उद्देश्य से मतदाताओं के बीच पहुंचकर उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
अभियान के तहत कांग्रेस जिलाध्यक्ष महेश द्विवेदी के साथ बैठक एवं जनसंपर्क, फतेहपुर में संवाद, कौशांबी में मतदाताओं से संपर्क और इलाहाबाद में बैठक प्रस्तावित थी। जनसंपर्क के दौरान समर्थकों ने शिवशंकर पटेल के पक्ष में समर्थन जुटाते हुए कहा कि इस बार स्नातकों को अपने हितों की रक्षा करने वाला प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिला है। उनका कहना था कि स्नातकों की आवाज को मजबूती देने के लिए जरूरी है कि मतदाता अपने अधिकारों, समस्याओं और भविष्य को प्राथमिकता दें।