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रिलीफ प्लसश् से मानसिक स्वास्थ्य सहायता कभी भी और कहीं भी मिल सकती हैरू प्रो. अम श्रीवास्तव
प्रयागराज, 16 सितंबर। मनोविज्ञान विभाग ने श्सेंटर फॉर हैप्पीनेस एंड वेल-बीइंगश्, ब्.ड.च्. डिग्री कॉलेज के सहयोग से ष्मानसिक स्वास्थ्य के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोगष् विषय पर एक जागरूकता व्याख्यान आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों के बीच मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य, भावनात्मक भलाई, तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के प्रति अधिक खुले और संवेदनशील दृष्टिकोण को विकसित करने की आवश्यकता के बारे में जागरूकता पैदा करना था।
यह कार्यक्रम माननीय अध्यक्ष चैधरी राघवेंद्र नाथ सिंह और प्रिंसिपल प्रो. अजय प्रकाश खरे की देखरेख में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का संचालन मनोविज्ञान विभाग और श्सेंटर फॉर हैप्पीनेस एंड वेल-बीइंगश् की संयोजक डॉ. रुचिका वर्मा ने किया। उन्होंने बताया कि कॉलेज छात्रों की भलाई के लिए काम करने का लक्ष्य रखता है। छात्र मनोवैज्ञानिक मदद के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें इन प्लेटफॉर्म के सही इस्तेमाल के बारे में पता होना चाहिए।
इस व्याख्यान के मुख्य वक्ता जाने-माने मनोचिकित्सक प्रो. अमरीश श्रीवास्तव (डठठै, डक्, क्च्ड, थ्।च्।, थ्त्ब्च्ेलबी - लंदन, ओंटारियो, कनाडा) थे। छात्रों को संबोधित करते हुए प्रो. श्रीवास्तव ने कहा कि डिजिटल तकनीक मानवीय संवेदना (मउचंजील) का विकल्प नहीं, बल्कि एक पुल है। उन्होंने कहा, ष्भारत में सामाजिक कलंक और दूरी छात्रों को मदद लेने से रोकते हैं। श्रिलीफ प्लसश् जैसा डिजिटल प्लेटफॉर्म - एक ऐसा ऐप जो कभी भी और कहीं भी गोपनीय, प्रमाण-आधारित और आसानी से उपलब्ध सहायता प्रदान कर सकता है - बहुत उपयोगी साबित हो सकता है।ष् उन्होंने नैतिक टेली-काउंसलिंग, स्वयं-सहायता (ेमस-िीमसच) टूल्स और तनाव व चिंता के शुरुआती लक्षणों की पहचान करने के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया।
डॉ. रंजना तिवारी ने वक्ता का परिचय दिया और डॉ. प्रिया सोनी खरे ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। छात्र आयोजन टीम में शाम्भवी चैहान, हमजा खान, रिद्धि रस्तोगी, ऋचा द्विवेदी, अभिनव सिंह और हृदयांशी मौर्या शामिल थे। कार्यक्रम का समापन डॉ. प्रिया सोनी खरे के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. महेश कुमार मौर्या और श्रीमती शर्मिला श्रीवास्तव भी उपस्थित थीं।
यह कार्यक्रम माननीय अध्यक्ष चैधरी राघवेंद्र नाथ सिंह और प्रिंसिपल प्रो. अजय प्रकाश खरे की देखरेख में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का संचालन मनोविज्ञान विभाग और श्सेंटर फॉर हैप्पीनेस एंड वेल-बीइंगश् की संयोजक डॉ. रुचिका वर्मा ने किया। उन्होंने बताया कि कॉलेज छात्रों की भलाई के लिए काम करने का लक्ष्य रखता है। छात्र मनोवैज्ञानिक मदद के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें इन प्लेटफॉर्म के सही इस्तेमाल के बारे में पता होना चाहिए।
इस व्याख्यान के मुख्य वक्ता जाने-माने मनोचिकित्सक प्रो. अमरीश श्रीवास्तव (डठठै, डक्, क्च्ड, थ्।च्।, थ्त्ब्च्ेलबी - लंदन, ओंटारियो, कनाडा) थे। छात्रों को संबोधित करते हुए प्रो. श्रीवास्तव ने कहा कि डिजिटल तकनीक मानवीय संवेदना (मउचंजील) का विकल्प नहीं, बल्कि एक पुल है। उन्होंने कहा, ष्भारत में सामाजिक कलंक और दूरी छात्रों को मदद लेने से रोकते हैं। श्रिलीफ प्लसश् जैसा डिजिटल प्लेटफॉर्म - एक ऐसा ऐप जो कभी भी और कहीं भी गोपनीय, प्रमाण-आधारित और आसानी से उपलब्ध सहायता प्रदान कर सकता है - बहुत उपयोगी साबित हो सकता है।ष् उन्होंने नैतिक टेली-काउंसलिंग, स्वयं-सहायता (ेमस-िीमसच) टूल्स और तनाव व चिंता के शुरुआती लक्षणों की पहचान करने के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया।
डॉ. रंजना तिवारी ने वक्ता का परिचय दिया और डॉ. प्रिया सोनी खरे ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। छात्र आयोजन टीम में शाम्भवी चैहान, हमजा खान, रिद्धि रस्तोगी, ऋचा द्विवेदी, अभिनव सिंह और हृदयांशी मौर्या शामिल थे। कार्यक्रम का समापन डॉ. प्रिया सोनी खरे के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. महेश कुमार मौर्या और श्रीमती शर्मिला श्रीवास्तव भी उपस्थित थीं।