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ऑपरेशन मेघदूत के शहीद के घर पहुंची सियाचिन की मिट्टी युद्धक्षेत्र की मिट्टी और प्रशस्ति पत्र पाकर परिजनों ने जताया गर्व
प्रातःकाल एक्सप्रेस
प्रयागराज। दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन में ऑपरेशन मेघदूत के दौरान 29 मई 1984 को शहीद हुए सेकंड लेफ्टिनेंट प्रदीप सिंह पुंडीर के प्रयागराज स्थित घर पर 24 सितंबर 2026 को भारतीय सेना की ओर से युद्धक्षेत्र की मिट्टी और प्रशस्ति पत्र पहुंचाया गया। सेना के जवान अजय परिहार ने सियाचिन से लाई गई मिट्टी और सम्मान पत्र शहीद के छोटे भाई नीरज सिंह पुंडीर को ससम्मान सौंपा।
सेकंड लेफ्टिनेंट प्रदीप सिंह पुंडीर भारतीय सेना की 19 कुमाऊं रेजिमेंट के जांबाज अधिकारी थे। वर्ष 1984 में सियाचिन में शुरू हुए ऑपरेशन मेघदूत के शुरुआती और चुनौतीपूर्ण दौर में उन्हें महत्वपूर्ण सैन्य अभियान में तैनात किया गया था। इसी दौरान 29 मई को बर्फीले तूफान की चपेट में आने से उन्होंने अपने साथियों के साथ देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
प्रदीप सिंह पुंडीर मूल रूप से प्रयागराज के रहने वाले थे और 26 अगस्त 1982 को 19 कुमाऊं रेजिमेंट में सेकंड लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन हुए थे। सियाचिन में उनकी शहादत भारतीय सेना के इतिहास के साहस और बलिदान के उल्लेखनीय अध्यायों में शामिल है।
भारतीय सेना द्वारा शहीदों के सम्मान और उनके परिजनों तक युद्धक्षेत्र की मिट्टी पहुंचाने के क्रम में प्रयागराज में यह सम्मान पहुंचाया गया। मिट्टी और प्रशस्ति पत्र प्राप्त कर परिजनों ने शहीद प्रदीप सिंह पुंडीर की वीरता और बलिदान को याद किया तथा इसे परिवार के लिए गौरव का क्षण बताया। यह सम्मान भारतीय सेना की ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट के कर्नल प्रशांत कुमार और सब मेजर अंबेश चैहान की ओर से भेजा गया था।
प्रयागराज। दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन में ऑपरेशन मेघदूत के दौरान 29 मई 1984 को शहीद हुए सेकंड लेफ्टिनेंट प्रदीप सिंह पुंडीर के प्रयागराज स्थित घर पर 24 सितंबर 2026 को भारतीय सेना की ओर से युद्धक्षेत्र की मिट्टी और प्रशस्ति पत्र पहुंचाया गया। सेना के जवान अजय परिहार ने सियाचिन से लाई गई मिट्टी और सम्मान पत्र शहीद के छोटे भाई नीरज सिंह पुंडीर को ससम्मान सौंपा।
सेकंड लेफ्टिनेंट प्रदीप सिंह पुंडीर भारतीय सेना की 19 कुमाऊं रेजिमेंट के जांबाज अधिकारी थे। वर्ष 1984 में सियाचिन में शुरू हुए ऑपरेशन मेघदूत के शुरुआती और चुनौतीपूर्ण दौर में उन्हें महत्वपूर्ण सैन्य अभियान में तैनात किया गया था। इसी दौरान 29 मई को बर्फीले तूफान की चपेट में आने से उन्होंने अपने साथियों के साथ देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
प्रदीप सिंह पुंडीर मूल रूप से प्रयागराज के रहने वाले थे और 26 अगस्त 1982 को 19 कुमाऊं रेजिमेंट में सेकंड लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन हुए थे। सियाचिन में उनकी शहादत भारतीय सेना के इतिहास के साहस और बलिदान के उल्लेखनीय अध्यायों में शामिल है।
भारतीय सेना द्वारा शहीदों के सम्मान और उनके परिजनों तक युद्धक्षेत्र की मिट्टी पहुंचाने के क्रम में प्रयागराज में यह सम्मान पहुंचाया गया। मिट्टी और प्रशस्ति पत्र प्राप्त कर परिजनों ने शहीद प्रदीप सिंह पुंडीर की वीरता और बलिदान को याद किया तथा इसे परिवार के लिए गौरव का क्षण बताया। यह सम्मान भारतीय सेना की ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट के कर्नल प्रशांत कुमार और सब मेजर अंबेश चैहान की ओर से भेजा गया था।