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मियावाकी पद्धति से झांसी में बढ़ रही हरियाली, रेलवे-वन विभाग की संयुक्त पहल से 1.15 लाख पौधों का सघन रोपण
झांसी। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और बदलते पर्यावरणीय परिवेश के बीच झांसी में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए रेलवे और वन विभाग ने मियावाकी पद्धति को अपनाते हुए बड़े स्तर पर पौधरोपण किया है। इस तकनीक के माध्यम से कम भूमि में अधिक घना वन विकसित किया जा रहा है। झांसी मंडल, उत्तर मध्य रेलवे और उत्तर प्रदेश वन विभाग के संयुक्त प्रयास से रेलवे की लगभग 3.39 हेक्टेयर भूमि पर कुल 1.15 लाख पौधे लगाए गए हैं।
रेलवे मंडल और वन विभाग के बीच 28 जनवरी 2026 को हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत रेलवे भूमि पर सघन मियावाकी वन विकसित करने का कार्य शुरू किया गया। आरपीएफ टीए कैंप, झांसी में करीब 1.30 हेक्टेयर भूमि पर 32 हजार पौधे लगाए गए हैं। वहीं इलेक्ट्रिक लोको शेड के निकट लगभग 2.09 हेक्टेयर भूमि में 83 हजार पौधों का रोपण किया गया है।
मियावाकी पद्धति जापान के प्रसिद्ध वनस्पति वैज्ञानिक प्रो. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित वनीकरण तकनीक है। इसमें स्थानीय और देशी प्रजातियों के पौधों को कम दूरी पर लगाया जाता है, जिससे कम समय में घना और विविधतापूर्ण वन विकसित हो सके। इस पद्धति में एक वर्ग मीटर क्षेत्र में सामान्यतः तीन से पांच पौधे लगाए जाते हैं। पौधरोपण से पहले मिट्टी को पौधों के अनुकूल तैयार किया जाता है और शुरुआती वर्षों में नियमित सिंचाई एवं देखभाल की जाती है।
झांसी में विकसित किए जा रहे मियावाकी वन में पीपल, जामुन, अर्जुन, नीम, महुआ, कचनार, शीशम, अशोक, बरगद, आम, अमरूद, बेलपत्र, तुलसी, अश्वगंधा और लेमन ग्रास सहित करीब 35 देशी, औषधीय एवं पर्यावरणीय महत्व वाली प्रजातियां शामिल हैं। वन विभाग द्वारा इन पौधों की आगामी चार वर्षों तक देखभाल की जाएगी।
मियावाकी तकनीक से विकसित सघन वन वायु की गुणवत्ता सुधारने, धूल एवं प्रदूषण को कम करने, कार्बन अवशोषण बढ़ाने तथा पक्षियों और छोटे जीव-जंतुओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में सहायक माने जाते हैं। कम भूमि में अधिक हरियाली विकसित करने की क्षमता के कारण शहरी क्षेत्रों में इस तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
झांसी मंडल की ओर से रेलवे स्टेशनों, कार्यालय परिसरों, रेलवे कॉलोनियों और अन्य उपलब्ध भूमि पर भी पौधरोपण एवं हरित क्षेत्र विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। रेलवे का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उपलब्ध भूमि का योजनाबद्ध पर्यावरणीय उपयोग करते हुए दीर्घकालिक हरित क्षेत्र तैयार करना है।
मियावाकी पद्धति से किए गए कार्यों के अनुभव के आधार पर रेलवे और वन विभाग द्वारा झांसी मंडल के अन्य उपयुक्त स्थलों पर भी ऐसे सघन वन विकसित करने की योजना तैयार की जा रही है। इससे रेलवे परिसरों को पर्यावरण-अनुकूल बनाने के साथ झांसी में हरियाली और जैव-विविधता को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
रेलवे मंडल और वन विभाग के बीच 28 जनवरी 2026 को हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत रेलवे भूमि पर सघन मियावाकी वन विकसित करने का कार्य शुरू किया गया। आरपीएफ टीए कैंप, झांसी में करीब 1.30 हेक्टेयर भूमि पर 32 हजार पौधे लगाए गए हैं। वहीं इलेक्ट्रिक लोको शेड के निकट लगभग 2.09 हेक्टेयर भूमि में 83 हजार पौधों का रोपण किया गया है।
मियावाकी पद्धति जापान के प्रसिद्ध वनस्पति वैज्ञानिक प्रो. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित वनीकरण तकनीक है। इसमें स्थानीय और देशी प्रजातियों के पौधों को कम दूरी पर लगाया जाता है, जिससे कम समय में घना और विविधतापूर्ण वन विकसित हो सके। इस पद्धति में एक वर्ग मीटर क्षेत्र में सामान्यतः तीन से पांच पौधे लगाए जाते हैं। पौधरोपण से पहले मिट्टी को पौधों के अनुकूल तैयार किया जाता है और शुरुआती वर्षों में नियमित सिंचाई एवं देखभाल की जाती है।
झांसी में विकसित किए जा रहे मियावाकी वन में पीपल, जामुन, अर्जुन, नीम, महुआ, कचनार, शीशम, अशोक, बरगद, आम, अमरूद, बेलपत्र, तुलसी, अश्वगंधा और लेमन ग्रास सहित करीब 35 देशी, औषधीय एवं पर्यावरणीय महत्व वाली प्रजातियां शामिल हैं। वन विभाग द्वारा इन पौधों की आगामी चार वर्षों तक देखभाल की जाएगी।
मियावाकी तकनीक से विकसित सघन वन वायु की गुणवत्ता सुधारने, धूल एवं प्रदूषण को कम करने, कार्बन अवशोषण बढ़ाने तथा पक्षियों और छोटे जीव-जंतुओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में सहायक माने जाते हैं। कम भूमि में अधिक हरियाली विकसित करने की क्षमता के कारण शहरी क्षेत्रों में इस तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
झांसी मंडल की ओर से रेलवे स्टेशनों, कार्यालय परिसरों, रेलवे कॉलोनियों और अन्य उपलब्ध भूमि पर भी पौधरोपण एवं हरित क्षेत्र विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। रेलवे का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उपलब्ध भूमि का योजनाबद्ध पर्यावरणीय उपयोग करते हुए दीर्घकालिक हरित क्षेत्र तैयार करना है।
मियावाकी पद्धति से किए गए कार्यों के अनुभव के आधार पर रेलवे और वन विभाग द्वारा झांसी मंडल के अन्य उपयुक्त स्थलों पर भी ऐसे सघन वन विकसित करने की योजना तैयार की जा रही है। इससे रेलवे परिसरों को पर्यावरण-अनुकूल बनाने के साथ झांसी में हरियाली और जैव-विविधता को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।