Varanasi
काशी नरेश विवि में टिफिन रेसिपी का प्रदर्शन पोषण माह के तहत 2-6 साल के बच्चों के लिए हुआ आयोजन
प्रातःकाल एक्सप्रेस
फोटो 03
भदोही। शनिवार को काशी नरेश विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग में पोषण माह 2026 जिसकी थीम इस वर्ष पोषण की शक्ति को जाने है। इसी के अंतर्गत पोषण की जागरूकता लाने के लिए टिफिन रेसिपी का प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
बच्चे अपने दिन का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 6 से 8 घंटे) स्कूल में बिताते हैं, जहाँ वे पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों में भी भाग लेते हैं। ऐसे में उन्हें एक संतुलित और पौष्टिक आहार की सख्त जरूरत होती है, जो उन्हें घर के बने टिफिन से ही मिल सकता है।बच्चों के विकास और स्वास्थ्य के लिए टिफिन क्यों बेहद जरूरी है, निरंतर ऊर्जा और बेहतर फोकस स्कूल में लंच टाइम तक बच्चे सुबह के नाश्ते की ऊर्जा खर्च कर चुके होते हैं। यदि उन्हें दोपहर में सही पोषण न मिले, तो वे थकान और सुस्ती महसूस करने लगते हैं। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, दोपहर का भोजन बच्चों की दैनिक पोषण संबंधी आवश्यकताओं का 25ः से अधिक हिस्सा पूरा करता है। एक हेल्दी टिफिन बच्चों के ब्लड शुगर को स्थिर रखता है, जिससे स्कूल के आखिरी घंटों तक उनका ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रहता है। टिफिन जंक फूड और फास्ट फूड से बचाव करता है जब बच्चों के पास घर का बना स्वादिष्ट टिफिन नहीं होता, तो वे भूख लगने पर स्कूल कैंटीन या बाहर मिलने वाले पैकेटबंद और प्रसंस्कृत (चतवबमेेमक) खाद्य पदार्थों की तरफ आकर्षित होते हैं। इन बाहरी खानों में अत्यधिक मैदा, चीनी, खराब फैट और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं, जो बच्चों में मोटापे और कम उम्र में बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं। घर का टिफिन उन्हें इन हानिकारक ईटिंग हैबिट्स से दूर रखता है। मजबूत इम्युनिटी और शारीरिक विकास बढ़ते बच्चों के शरीर को मांसपेशियों, हड्डियों और दिमागी विकास के लिए सही मात्रा में विटामिंस, मिनरल्स, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की आवश्यकता होती है। जब माता-पिता खुद टिफिन तैयार करते हैं, तो वे भोजन की मात्रा और उसकी गुणवत्ता को नियंत्रित कर सकते है। टिफिन में ताजे फल, हरी सब्जियां, पनीर, दालें या अंकुरित अनाज शामिल करने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।स्वतंत्रता और अच्छी आदतें लंच बॉक्स के जरिए बच्चे खुद से खाना सीखते हैं। दोस्तों के साथ बैठकर टिफिन शेयर करने से उनमें सामाजिक भावना का विकास होता है। जो बच्चे इससे अधिक समय तक जाते हैं,
आज की भागती दौड़ती जिंदगी में स्कूल टिफिन सुबह के नाश्ते और दोपहर के खाने के बीच का महत्वपूर्ण भाग है। अपने बच्चे के लिए स्वच्छ पानी की एक बोतल साथ रखना भी अच्छा विचार है, जिसे वह पी सके और फिर से भर सके। फलों के रस और शीतल पेय में चीनी की मात्रा अधिक होती है और ये बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं हैं।टिफिन बच्चो के अतिरिक्त कामकाजी महिलाओं और बाहर काम करने वाले पुरुषों के पोषणीय स्तर को बेहतर बनाने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के छात्राओं ने विभिन्न प्रकार की टिफिन व्यंजनों का प्रदर्शन किया जैसे सूजी के मोमो, सहजन के पत्तों का चीला, सूजी बॉल्स और स्नैक्स, ढोकला, पोहा, उपमा, इडली, राजमा और सोयाबीन कबाब, सैंडविच, विभिन्न प्रकार के हलवा लौकी ,गाजर और सूजी से निर्मित, साबूदाना खिचड़ी और वड़ा अन्य व्यंजनों कि प्रदर्शनी की जिसमें- बी ऐ प्रथम सेम, बी ए तृतीय सेम और एम ऐ तृतीय सेम की छात्राओं के विभिन्न व्यंजनों का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का आयोजन डॉक्टर मधु विश्वकर्मा और डॉक्टर जान्हवी त्रिपाठी, तथा विभाग प्रभारी डॉक्टर ईरा त्रिपाठी द्वारा किया गया।
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भदोही। शनिवार को काशी नरेश विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग में पोषण माह 2026 जिसकी थीम इस वर्ष पोषण की शक्ति को जाने है। इसी के अंतर्गत पोषण की जागरूकता लाने के लिए टिफिन रेसिपी का प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
बच्चे अपने दिन का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 6 से 8 घंटे) स्कूल में बिताते हैं, जहाँ वे पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों में भी भाग लेते हैं। ऐसे में उन्हें एक संतुलित और पौष्टिक आहार की सख्त जरूरत होती है, जो उन्हें घर के बने टिफिन से ही मिल सकता है।बच्चों के विकास और स्वास्थ्य के लिए टिफिन क्यों बेहद जरूरी है, निरंतर ऊर्जा और बेहतर फोकस स्कूल में लंच टाइम तक बच्चे सुबह के नाश्ते की ऊर्जा खर्च कर चुके होते हैं। यदि उन्हें दोपहर में सही पोषण न मिले, तो वे थकान और सुस्ती महसूस करने लगते हैं। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, दोपहर का भोजन बच्चों की दैनिक पोषण संबंधी आवश्यकताओं का 25ः से अधिक हिस्सा पूरा करता है। एक हेल्दी टिफिन बच्चों के ब्लड शुगर को स्थिर रखता है, जिससे स्कूल के आखिरी घंटों तक उनका ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रहता है। टिफिन जंक फूड और फास्ट फूड से बचाव करता है जब बच्चों के पास घर का बना स्वादिष्ट टिफिन नहीं होता, तो वे भूख लगने पर स्कूल कैंटीन या बाहर मिलने वाले पैकेटबंद और प्रसंस्कृत (चतवबमेेमक) खाद्य पदार्थों की तरफ आकर्षित होते हैं। इन बाहरी खानों में अत्यधिक मैदा, चीनी, खराब फैट और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं, जो बच्चों में मोटापे और कम उम्र में बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं। घर का टिफिन उन्हें इन हानिकारक ईटिंग हैबिट्स से दूर रखता है। मजबूत इम्युनिटी और शारीरिक विकास बढ़ते बच्चों के शरीर को मांसपेशियों, हड्डियों और दिमागी विकास के लिए सही मात्रा में विटामिंस, मिनरल्स, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की आवश्यकता होती है। जब माता-पिता खुद टिफिन तैयार करते हैं, तो वे भोजन की मात्रा और उसकी गुणवत्ता को नियंत्रित कर सकते है। टिफिन में ताजे फल, हरी सब्जियां, पनीर, दालें या अंकुरित अनाज शामिल करने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।स्वतंत्रता और अच्छी आदतें लंच बॉक्स के जरिए बच्चे खुद से खाना सीखते हैं। दोस्तों के साथ बैठकर टिफिन शेयर करने से उनमें सामाजिक भावना का विकास होता है। जो बच्चे इससे अधिक समय तक जाते हैं,
आज की भागती दौड़ती जिंदगी में स्कूल टिफिन सुबह के नाश्ते और दोपहर के खाने के बीच का महत्वपूर्ण भाग है। अपने बच्चे के लिए स्वच्छ पानी की एक बोतल साथ रखना भी अच्छा विचार है, जिसे वह पी सके और फिर से भर सके। फलों के रस और शीतल पेय में चीनी की मात्रा अधिक होती है और ये बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं हैं।टिफिन बच्चो के अतिरिक्त कामकाजी महिलाओं और बाहर काम करने वाले पुरुषों के पोषणीय स्तर को बेहतर बनाने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के छात्राओं ने विभिन्न प्रकार की टिफिन व्यंजनों का प्रदर्शन किया जैसे सूजी के मोमो, सहजन के पत्तों का चीला, सूजी बॉल्स और स्नैक्स, ढोकला, पोहा, उपमा, इडली, राजमा और सोयाबीन कबाब, सैंडविच, विभिन्न प्रकार के हलवा लौकी ,गाजर और सूजी से निर्मित, साबूदाना खिचड़ी और वड़ा अन्य व्यंजनों कि प्रदर्शनी की जिसमें- बी ऐ प्रथम सेम, बी ए तृतीय सेम और एम ऐ तृतीय सेम की छात्राओं के विभिन्न व्यंजनों का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का आयोजन डॉक्टर मधु विश्वकर्मा और डॉक्टर जान्हवी त्रिपाठी, तथा विभाग प्रभारी डॉक्टर ईरा त्रिपाठी द्वारा किया गया।