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जीवन रुपी गाड़ी में संयम के ब्रेक लगायें: विशाश्री माताजी
झांसी। अतिशय क्षेत्र करगुवांजी स्थित विद्यासागर सभागार में पर्युषण पर्व"के छठवें दिन उत्तम संयम पर्व पर मंगल देशना देते हुए गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माताजी ने कहा कि संयम का मतलब कंट्रोल का दिन यानि खुद पर नियंत्रण। आंख, कान, जीभ आदि जैसी इंद्रियों पर ब्रेक लगाना है अर्थात बेवजह कुछ भी देखना, सुनना और खाना टालना है। उन्होंने कहा कि संयम हमारा बड़ा मित्र है जो अनंत सुख की खोज ही नहीं प्राप्ति भी कराता है। संयम रूपी यह रत्न सौधर्म इंद्र के खजाने से नहीं मिलता यह तो हम सभी के भीतर से ही प्रकट होगा। जिसने सत्य को पहचान लिया है उसके जीवन में संयम अपने आप घटित होगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार बिना संयम के एक ड्राइवर गाड़ी चलाता है तो वह खाई में गिर सकती है इसी प्रकार जीवन रुपी गाड़ी को चलाने के लिए संयम जरूरी है। उन्होंने कि अनेकों पशु पक्षियों ने भी संयम धारण कर भगवत्ता को प्राप्त किया है। वे कहती हैं कि जिस प्रकार नदी के दो किनारे हैं उसी प्रकार संयम के भी दो किनारे हैं एक वाणी संयम और दूसरा इंद्रिय संयम। वे कहती हैं कि जीवन की गाड़ी में ब्रेक आवश्यक है। बिना ब्रेक के चल रही जीवन की गाड़ी कब किस खाई में गिर जाये पता नहीं अर्थात कब अंतिम श्वांस का विसर्जन हो यह किसी को ज्ञात नहीं है, इसलिए आज और अभी से संयम को अपने आचरण में धारण कर लेना।इससे पूर्व भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान के पचासवें दिन के पुण्यार्जक डा.निर्देश जैन,डा.रुचि जैन, काव्या, भाव्या, दीपचंद जैन, श्रीमती भागवती जैन,राकेश कुमार जैन, श्रीमती सरोज जैन एवं समस्त चौधरी परिवार बरुआसागर रहे, जिन्होंने शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त किया, माताजी को शास्त्र भेंटकर पाद प्रक्षालन किया एवं पं.कमलेश जैन शास्त्री छतरपुर के मार्गदर्शन में समस्त धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कराते हुए अर्घ समर्पित किये। प्रारंभ में पुण्यार्जक परिजनों ने आचार्य श्री विराग सागर एवं विमल सागर जी के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित करने का सौभाग्य प्राप्त किया।संचालन कमल जैन लोकपथ एवं एड.शिरोमणी जैन ने संयुक्त रुप से किया।अंत में सि.संजय कुमार जैन एवं भागचंद जैन ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर रवींद्र जैन रेल्वे,रानू जैन, विकास जैन, श्रीमती रानी जैन, श्रीमती प्रीति जैन, सहित बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु मौजूद रहे।