एआइ के शैक्षणिक उपयोग और साइबर सुरक्षा के गुर सीख रहे शिक्षक
कौशाम्बी। एआइ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के शैक्षणिक उपयोग और तकनीकी दक्षता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण के चतुर्थ बैच का समापन शनिवार को हो गया। तीन दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को शिक्षा के क्षेत्र में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के प्रभावी उपयोग, डिजिटल साक्षरता, साइबर नैतिकता और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। साथ ही बदलते शैक्षणिक परिवेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उपयोगिता और शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में इसकी भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
प्रशिक्षण के दौरान संदर्भदाताओं देवेश कुमार यादव, नरेंद्र कुमार, शबनम सिद्दीकी, अनामिका सिंह, देवेंद्र सिंह, हरिओम सिंह और दीपनारायण मिश्र ने अलग-अलग सत्रों में प्रतिभागियों के साथ विषयगत जानकारी साझा की। इसमें शिक्षा में आईसीटी का परिचय, डिजिटल संसाधनों का उपयोग, डिजिटल साक्षरता, साइबर नैतिकता और फेक न्यूज की पहचान जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। प्रतिभागियों को बताया गया कि डिजिटल माध्यमों से प्राप्त सूचनाओं पर आंख मूंदकर विश्वास करने के बजाय उनकी सत्यता की जांच करना आवश्यक है। इंटरनेट पर भ्रामक सूचनाओं की पहचान और डिजिटल प्लेटफार्मों का जिम्मेदारीपूर्वक इस्तेमाल करना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण जरूरत है।
प्रशिक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के शैक्षणिक उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। इसके माध्यम से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को सरल, रोचक और प्रभावी बनाने की संभावनाओं से प्रतिभागियों को परिचित कराया गया। इसके साथ ही आईसीटी आधारित मूल्यांकन, विद्यालय में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के प्रबंधन, डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को तकनीकी संसाधनों के उपयोग के दौरान सावधानी बरतने और विद्यार्थियों की जानकारी की गोपनीयता बनाए रखने के महत्व से अवगत कराया गया।
प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों और अन्य प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकी साधनों के प्रति दक्ष बनाना तथा शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए तैयार करना रहा। प्रशिक्षण के अंतिम दिन वरिष्ठ प्रवक्ता अनूप कुमार ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए। इसके साथ ही तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ।
प्रशिक्षण के दौरान संदर्भदाताओं देवेश कुमार यादव, नरेंद्र कुमार, शबनम सिद्दीकी, अनामिका सिंह, देवेंद्र सिंह, हरिओम सिंह और दीपनारायण मिश्र ने अलग-अलग सत्रों में प्रतिभागियों के साथ विषयगत जानकारी साझा की। इसमें शिक्षा में आईसीटी का परिचय, डिजिटल संसाधनों का उपयोग, डिजिटल साक्षरता, साइबर नैतिकता और फेक न्यूज की पहचान जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। प्रतिभागियों को बताया गया कि डिजिटल माध्यमों से प्राप्त सूचनाओं पर आंख मूंदकर विश्वास करने के बजाय उनकी सत्यता की जांच करना आवश्यक है। इंटरनेट पर भ्रामक सूचनाओं की पहचान और डिजिटल प्लेटफार्मों का जिम्मेदारीपूर्वक इस्तेमाल करना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण जरूरत है।
प्रशिक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के शैक्षणिक उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। इसके माध्यम से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को सरल, रोचक और प्रभावी बनाने की संभावनाओं से प्रतिभागियों को परिचित कराया गया। इसके साथ ही आईसीटी आधारित मूल्यांकन, विद्यालय में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के प्रबंधन, डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को तकनीकी संसाधनों के उपयोग के दौरान सावधानी बरतने और विद्यार्थियों की जानकारी की गोपनीयता बनाए रखने के महत्व से अवगत कराया गया।
प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों और अन्य प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकी साधनों के प्रति दक्ष बनाना तथा शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए तैयार करना रहा। प्रशिक्षण के अंतिम दिन वरिष्ठ प्रवक्ता अनूप कुमार ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए। इसके साथ ही तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ।