भारत-नेपाल सीमा पर आलू बीज की कथित तस्करी का मामला गरमाया,खाने वाले आलू की आड़ में बीज भेजने का आरोपय
लखीमपुर-खीरी 16 अक्टूबर। गौरीफंटा में कस्टम्स की सख्ती के बाद बदला रास्ता? रुपईडीहा बॉर्डर पर आलू की खेप को लेकर उठे सवाल, असिस्टेंट कमिश्नर ने जांच कराने की कही बात
इंडो-नेपाल बॉर्डर। भारत-नेपाल सीमा पर आलू बीज की कथित तस्करी को लेकर एक नया मामला सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, गौरीफंटा बॉर्डर पर कस्टम्स विभाग की सख्ती के बाद अब आलू की खेप रुपईडीहा बॉर्डर के रास्ते नेपाल भेजे जाने की चर्चाएं हैं। आरोप है कि खाने वाले आलू के नाम पर आलू बीज की खेप भेजने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
खाने वाले आलू की आड़ में बीज भेजने का आरोप
सूत्रों का दावा है कि आसपास की मंडियों और कोल्ड स्टोरेज से आलू की खेप रुपईडीहा बॉर्डर की ओर भेजी जा रही है। यह भी दावा किया जा रहा है कि आलू बीज से लदे सैकड़ों ट्रक सीमा पर पहुंचकर कस्टम्स की अनुमति मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि इन दावों में सच्चाई है, तो यह जांच का महत्वपूर्ण विषय हो सकता है कि ट्रकों में वास्तव में किस प्रकार का आलू लदा है और उसके निर्यात से संबंधित नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
असिस्टेंट कमिश्नर तक पहुंचा मामला, जांच का आश्वासन
इस मामले की जानकारी कस्टम्स विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर तक पहुंचने की बात कही जा रही है। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने मामले को दिखवाने और जांच कराने की बात कही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग रुपईडीहा बॉर्डर पर आलू से लदे ट्रकों की जांच करता है या नहीं और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।
कस्टम्स विभाग की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
गौरीफंटा बॉर्डर पर कथित सख्ती के बाद रुपईडीहा के रास्ते आलू की खेप भेजे जाने के दावों ने सीमा पर निगरानी और निर्यात प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, ट्रकों की वास्तविक संख्या, उनमें लदे आलू की किस्म और किसी नियम के उल्लंघन की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
यदि जांच में निर्यात नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित खेप और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या कस्टम्स विभाग रुपईडीहा बॉर्डर पर पहुंच रहे आलू से लदे ट्रकों की सघन जांच कराएगा? क्या खाने वाले आलू की आड़ में बीज भेजे जाने के आरोपों की सच्चाई सामने आएगी? इन सवालों के जवाब अब विभागीय जांच और आधिकारिक कार्रवाई से ही मिल सकेंगे।
इंडो-नेपाल बॉर्डर। भारत-नेपाल सीमा पर आलू बीज की कथित तस्करी को लेकर एक नया मामला सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, गौरीफंटा बॉर्डर पर कस्टम्स विभाग की सख्ती के बाद अब आलू की खेप रुपईडीहा बॉर्डर के रास्ते नेपाल भेजे जाने की चर्चाएं हैं। आरोप है कि खाने वाले आलू के नाम पर आलू बीज की खेप भेजने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
खाने वाले आलू की आड़ में बीज भेजने का आरोप
सूत्रों का दावा है कि आसपास की मंडियों और कोल्ड स्टोरेज से आलू की खेप रुपईडीहा बॉर्डर की ओर भेजी जा रही है। यह भी दावा किया जा रहा है कि आलू बीज से लदे सैकड़ों ट्रक सीमा पर पहुंचकर कस्टम्स की अनुमति मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि इन दावों में सच्चाई है, तो यह जांच का महत्वपूर्ण विषय हो सकता है कि ट्रकों में वास्तव में किस प्रकार का आलू लदा है और उसके निर्यात से संबंधित नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
असिस्टेंट कमिश्नर तक पहुंचा मामला, जांच का आश्वासन
इस मामले की जानकारी कस्टम्स विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर तक पहुंचने की बात कही जा रही है। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने मामले को दिखवाने और जांच कराने की बात कही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग रुपईडीहा बॉर्डर पर आलू से लदे ट्रकों की जांच करता है या नहीं और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।
कस्टम्स विभाग की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
गौरीफंटा बॉर्डर पर कथित सख्ती के बाद रुपईडीहा के रास्ते आलू की खेप भेजे जाने के दावों ने सीमा पर निगरानी और निर्यात प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, ट्रकों की वास्तविक संख्या, उनमें लदे आलू की किस्म और किसी नियम के उल्लंघन की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
यदि जांच में निर्यात नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित खेप और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या कस्टम्स विभाग रुपईडीहा बॉर्डर पर पहुंच रहे आलू से लदे ट्रकों की सघन जांच कराएगा? क्या खाने वाले आलू की आड़ में बीज भेजे जाने के आरोपों की सच्चाई सामने आएगी? इन सवालों के जवाब अब विभागीय जांच और आधिकारिक कार्रवाई से ही मिल सकेंगे।