भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है लोक पर्व ढेढिया
कौशाम्बी। विकास खंड नेवादा के प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर में शनिवार को अवध क्षेत्र के प्रसिद्ध लोक पर्व ढेढिया को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान छात्राओं ने मिट्टी के ढेढिया में दीप जलाकर पारंपरिक रीति-रिवाजों का प्रदर्शन किया। साथ ही लोकगीतों के माध्यम से भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का संदेश दिया। शिक्षकों ने बच्चों को इस पर्व की मान्यताओं और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी।
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सुमन कुशवाहा ने बताया कि ढेढिया अवध क्षेत्र का प्रसिद्ध लोक पर्व है, जिसे शरद पूर्णिमा से दीपावली के बीच मनाया जाता है। यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और भाई की सुख-समृद्धि व दीर्घायु की कामना का प्रतीक है। इस अवसर पर छात्राओं ने मिट्टी के छोटे घड़े में दीप जलाकर पारंपरिक विधि से अपने भाइयों की नजर उतारने की रस्म निभाई और उनके मंगलमय भविष्य की कामना की। छात्राओं ने श्ढेढिया-ढेढिया रानी, झनका-झनका पानीश् जैसे पारंपरिक लोकगीत गाकर कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
बच्चों को पर्व से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं से भी परिचित कराया गया। मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने पर माताओं और बहनों ने उनकी नजर उतारने के लिए छेद वाली मिट्टी की मटकी में दीप जलाकर परंपरा निभाई थी। तभी से यह पर्व मनाए जाने की मान्यता प्रचलित है। कार्यक्रम में सहायक अध्यापिका शैलजा और रीता दयाल सहित विद्यालय के शिक्षक उपस्थित रहे।
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सुमन कुशवाहा ने बताया कि ढेढिया अवध क्षेत्र का प्रसिद्ध लोक पर्व है, जिसे शरद पूर्णिमा से दीपावली के बीच मनाया जाता है। यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और भाई की सुख-समृद्धि व दीर्घायु की कामना का प्रतीक है। इस अवसर पर छात्राओं ने मिट्टी के छोटे घड़े में दीप जलाकर पारंपरिक विधि से अपने भाइयों की नजर उतारने की रस्म निभाई और उनके मंगलमय भविष्य की कामना की। छात्राओं ने श्ढेढिया-ढेढिया रानी, झनका-झनका पानीश् जैसे पारंपरिक लोकगीत गाकर कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
बच्चों को पर्व से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं से भी परिचित कराया गया। मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने पर माताओं और बहनों ने उनकी नजर उतारने के लिए छेद वाली मिट्टी की मटकी में दीप जलाकर परंपरा निभाई थी। तभी से यह पर्व मनाए जाने की मान्यता प्रचलित है। कार्यक्रम में सहायक अध्यापिका शैलजा और रीता दयाल सहित विद्यालय के शिक्षक उपस्थित रहे।