आयोग छात्र हित में फैसला वापस लें, दमनात्मक कार्यवाही उचित नहीं रू अजीत यादव कहा कि मृत छात्र के परिजनों को सरकार दें पर्याप्त मुआवजा

प्रयागराज। सपा के प्रदेश प्रवक्ता अजीत यादव ने आज कहा कि भाजपा सरकार में युवा बेरोजगार सबसे ज्यादा परेशान है। रोजगार ना मिलने से युवा हताशा में आत्महत्या करने को मजबूर हो गये है। उन्होंने कहा कि युवा नौकरी ना मिलने से तनाव, अवसाद (डिप्रेशन) और निराशा में अपना भविष्य खराब होते देख आत्महत्या जैसे कदम उठाने को
मजबूर है । आयोग को विचार कर छात्र हित में फैसला लेना चाहिए न कि उनके ख़िलाफ दमनात्मक कार्यवाही करनी चाहिए । पुलिस - प्रशासन का रवैया आंदोलन कारी छात्रों के साथ ठीक नहीं है किसी की मांग को लोकतंत्र में जोर जबरदस्ती से दबाना कहीं से भी उचित और न्याय संगत नहीं है । हमारी मांग है कि छात्र हित को देखते हुए सरकार और आयोग को पुनरू विचार करते हुए अपना निर्णय वापस लेना चाहिए ।
सपा के प्रदेश प्रवक्ता अजीत यादव ने कहा कि रविवार को एक छात्र विजय गौतम जो सलोरी में रहकर टीजीटी,और पीजीटी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था, वह मानसिक दबाव में उस छात्र की ब्रेन हेमरेज या हार्ट अटैक से मौत हो गई है उसके परिजनों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाये।
उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग प्रयागराज आनन - फानन में जल्दी - जल्दी परीक्षा नियमावली में संशोधन कर दिया।
सपा के प्रदेश प्रवक्ता अजीत यादव ने कहा कि पुरानी परीक्षा प्रणाली में बदलाव कर भर्तियों में संशोधन कर नई व्यवस्था और नियमावली छात्रों पर जबरदस्ती थोपना कहीं से भी जायज और उचित नहीं है । नयी व्यवस्था को लेकर अभ्यर्थी परेशान हैं इससे हजारों छात्रों का भविष्य बर्बाद व खराब हो जाएगा । आंदोलनरत अभ्यर्थियों की मांग है कि जो लगभग 12 बदलाव किए गए हैं उसको सरकार वापस ले और पुरानी प्रणाली से परीक्षा आयोजित कराये ।
सपा के प्रदेश प्रवक्ता अजीत यादव ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बदलाव जो किया गया है वह पीजीटी में बीएड अनिवार्य व सब्जेक्ट के साथ जनरल नॉलेज के सवाल भी पूछे जाएँगे ।प्राविधिक कला को अमान्य कर दिया गया । इस तरह से शिक्षा सेवा चयन आयोग छात्रों के साथ मनमाना बर्ताव कर रहा है । छात्र - छात्राएं और अन्य संगठन लगातार धरना प्रदर्शन और जुलूस निकाल कर नये नियमावली का विरोध कर रहे हैं लेकिन ना तो सरकार ना ही चयन आयोग और ना ही प्रशासन छात्रों की मांग सुनने को तैयार नहीं है ।एक तो सात साल के बाद भर्ती भी आई है छात्र कितने परेशानियों में रहकर पढ़ाई कर रहा है उस पर रोज - रोज नए - नए नियम बनते और लागू होते जा रहे है जिससे छात्र उसी में उलझ कर रह जाए और आगे के लिए कुछ प्लानिंग ही ना कर पाए । आज प्रतियोगी छात्रों का भविष्य इस तरह अधर में लटका है कि आगे कुँआ पीछे खायीं ही दिखाई पड़ती है । इसी
उधेड़बुन में छात्रों का जीवन बर्बाद हो रहा है । प्रयागराज में लगभग एकाध दिन छोड़ दिया जाए तो कोई न कोई
छात्र या छात्रा या तो आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर है । या तनाव डिप्रेशन के कारण हार्ट अटैक से मौत हो जा रही है । यह बहुत दुरूखद व् चिंतनीय विषय है । सरकार को इस पर पुनरू संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए और आयोग को तत्काल अपने फैसले को बदलना चाहिए । छात्रों से आयोग के चेयरमैन को संवाद कर अपनी स्थिति को भी स्पष्ट करना चाहिए और जो भी निर्णय हो वह छात्रों के हित को देखते हुए ही लिया जाए ताकि छात्र - छात्राएं दोनों ही इससे संतुष्ट हो सकें ।
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