आसमान से बरसी राहत: सिद्धार्थनगर में मूसलाधार बारिश से धान की फसल को मिला जीवनदान, किसानों के खिले चेहरे

सिद्धार्थनगर, 25 सितम्बर। पूरा मानसूनी सीजन बीत जाने के बाद आखिरकार कुदरत जनपद के किसानों पर मेहरबान हो ही गई। 23 सितंबर से जिले में लगातार हो रही झमाझम और मूसलाधार बारिश ने सूखने की कगार पर खड़ी धान की फसल को नया जीवनदान दिया है। खेतों में सूखते पौधों और दरकती जमीन को देखकर मायूस हो चुके किसानों के चेहरों पर अब सुकून और मुस्कान लौट आई है।
जिले में इस वर्ष पूरा बरसात का मौसम लगभग सूखा या छिटपुट बारिश के भरोसे ही बीत गया था। मानसून के मुख्य महीनों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई, जिससे अन्नदाता गहरी चिंता में घिरे थे। सितंबर के अंतिम पखवारे में जब मानसून विदाई की ओर था, तभी 23 सितंबर से मौसम ने अचानक करवट ली। पूरे सीजन में इस तरह की लगातार और झमाझम बारिश पहली बार देखने को मिली है, जिसने सूखे के मुहाने पर खड़ी फसल को संजीवनी दे दी।
बारिश के अभाव में किसान बेहद बेबस नजर आ रहे थे। खेतों में अभी बालियां नहीं निकली थीं, लेकिन पौधों की बढ़वार और गभोट की अवस्था के लिए पानी की सबसे ज्यादा दरकार थी। नहरों और सरकारी नलकूपों की सीमित पहुंच के चलते ज्यादातर किसान महंगे दामों पर डीजल पंपिंग सेट चलाकर खेतों में सिंचाई करने को मजबूर थे। खेती की लागत लगातार बढ़ने से किसानों की आर्थिक कमर टूट रही थी, वहीं कई इलाकों में पानी न मिलने से खेत फटने लगे थे और किसान मान बैठे थे कि अब फसल पूरी तरह हाथ से निकल जाएगी।
कुदरत के इस बदले रुख ने अन्नदाता को भारी आर्थिक नुकसान से उबार लिया है। कृषि जानकारों के अनुसार, यह बारिश धान की फसल के लिए ‘अमृत’ साबित होगी। खेतों में पर्याप्त पानी ठहरने से जहां महंगे सिंचाई खर्च से तुरंत मुक्ति मिल गई है, वहीं पौधों को जरूरी नमी मिलने से अब बालियों का विकास बेहतर होगा और बालियां पुष्ट निकलेंगी। जो किसान लागत बढ़ने और फसल बर्बाद होने के डर से मायूस बैठे थे, वे अब खेतों में लहलहाती फसल देखकर राहत की सांस ले रहे हैं।
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