50वें इंडिया कार्पेट एक्सपो में 35 से अधिक देशों के खरीदार पहुंचे
भदोही। कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (सीईपीसी) की ओर से आयोजित स्वर्ण जयंती 50वां इंडिया कार्पेट एक्सपो 4 से 7 अक्टूबर तक भदोही में चल रहा है। एक्सपो के पहले दो दिनों में 35 से अधिक देशों से करीब 189 विदेशी कालीन खरीदार और 211 खरीद प्रतिनिधि पहुंचे।
एक्सपो में 225 से अधिक प्रदर्शकों ने हस्तनिर्मित कालीन, गलीचे और अन्य फर्श सज्जा उत्पादों के नए संग्रह प्रदर्शित किए हैं। खरीदारों की मांग के अनुरूप आकार, डिजाइन, रंग और गुणवत्ता में तैयार उत्पाद आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
आयोजन के दौरान न्यूजीलैंड की ऊन तथा अमेजन ग्लोबल विक्रेता कार्यक्रम को लेकर जानकारीपरक सत्र आयोजित किए गए। भदोही के जिलाधिकारी शैलेश कुमार ने परिवार के साथ एक्सपो का दौरा कर प्रदर्शित उत्पादों की सराहना की।
एक्सपो में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, जापान, इटली, कनाडा, रूस और संयुक्त अरब अमीरात समेत विभिन्न देशों के खरीदार पहुंचे हैं। आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के लिए नए अंतरराष्ट्रीय व्यापार अवसर तैयार करना है।
भारत सरकार के सहयोग से आयोजित यह एक्सपो ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 20 लाख श्रमिकों और कारीगरों, विशेष रूप से महिलाओं, को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार देने वाले कालीन उद्योग को वैश्विक बाजार से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच है।
एक्सपो में 225 से अधिक प्रदर्शकों ने हस्तनिर्मित कालीन, गलीचे और अन्य फर्श सज्जा उत्पादों के नए संग्रह प्रदर्शित किए हैं। खरीदारों की मांग के अनुरूप आकार, डिजाइन, रंग और गुणवत्ता में तैयार उत्पाद आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
आयोजन के दौरान न्यूजीलैंड की ऊन तथा अमेजन ग्लोबल विक्रेता कार्यक्रम को लेकर जानकारीपरक सत्र आयोजित किए गए। भदोही के जिलाधिकारी शैलेश कुमार ने परिवार के साथ एक्सपो का दौरा कर प्रदर्शित उत्पादों की सराहना की।
एक्सपो में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, जापान, इटली, कनाडा, रूस और संयुक्त अरब अमीरात समेत विभिन्न देशों के खरीदार पहुंचे हैं। आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के लिए नए अंतरराष्ट्रीय व्यापार अवसर तैयार करना है।
भारत सरकार के सहयोग से आयोजित यह एक्सपो ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 20 लाख श्रमिकों और कारीगरों, विशेष रूप से महिलाओं, को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार देने वाले कालीन उद्योग को वैश्विक बाजार से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच है।