Uttar Pradesh
5 किलो एफटीएल सिलेंडर की जबरन बिक्री से नाराज एलपीजी वितरक, डीएम से लगाई कार्रवाई की गुहार
कुशीनगर-: गैस कंपनियों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (आई) ने जिलाधिकारी से शिकायत की है। वितरकों का आरोप है कि कंपनियां समझौते के विपरीत जाकर 5 किलोग्राम एफटीएल (फ्री ट्रेड एलपीजी), 19 किलोग्राम एनडी तथा एआरबी/एनएफआर उत्पादों की बिक्री के लिए दबाव बना रही हैं।
एसोसिएशन द्वारा डीएम को दिए गए शिकायती पत्र में कहा गया है कि समझौते में 5 किलोग्राम एफटीएल की बिक्री का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, फिर भी कंपनियों द्वारा वितरकों के इंडेंट में बदलाव कर इसकी आपूर्ति जबरन दिखाई जा रही है। इसे एलपीजी आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के प्रावधानों के विपरीत बताया गया है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि समझौता पत्र में एचआरजी/एनएफआर, चूल्हा, रबर पाइप, लाइटर, एप्रन, चायपत्ती और पानी आदि की बिक्री का कोई उल्लेख नहीं है, इसके बावजूद इन उत्पादों की बिक्री कर वितरकों के लोड खाते से धनराशि काटी जा रही है।
वितरकों ने आरोप लगाया कि 14.2 किलोग्राम घरेलू सिलेंडर के साथ 19 किलोग्राम कमर्शियल सिलेंडर बेचने की बाध्यता भी समझौते में नहीं है, लेकिन कंपनियां प्रत्येक लोड में निर्धारित मात्रा से अधिक माल भेजकर लक्ष्य पूरा करने के नाम पर आर्थिक और मानसिक दबाव बना रही हैं। एसोसिएशन ने कंपनियों द्वारा लागू एमडीजीजी का भी विरोध किया है, जिसके लिए मूल समझौते से अलग हस्ताक्षर कराए गए हैं।
वितरकों ने जिलाधिकारी से मामले का संज्ञान लेकर दबाव बंद कराने और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
एसोसिएशन द्वारा डीएम को दिए गए शिकायती पत्र में कहा गया है कि समझौते में 5 किलोग्राम एफटीएल की बिक्री का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, फिर भी कंपनियों द्वारा वितरकों के इंडेंट में बदलाव कर इसकी आपूर्ति जबरन दिखाई जा रही है। इसे एलपीजी आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के प्रावधानों के विपरीत बताया गया है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि समझौता पत्र में एचआरजी/एनएफआर, चूल्हा, रबर पाइप, लाइटर, एप्रन, चायपत्ती और पानी आदि की बिक्री का कोई उल्लेख नहीं है, इसके बावजूद इन उत्पादों की बिक्री कर वितरकों के लोड खाते से धनराशि काटी जा रही है।
वितरकों ने आरोप लगाया कि 14.2 किलोग्राम घरेलू सिलेंडर के साथ 19 किलोग्राम कमर्शियल सिलेंडर बेचने की बाध्यता भी समझौते में नहीं है, लेकिन कंपनियां प्रत्येक लोड में निर्धारित मात्रा से अधिक माल भेजकर लक्ष्य पूरा करने के नाम पर आर्थिक और मानसिक दबाव बना रही हैं। एसोसिएशन ने कंपनियों द्वारा लागू एमडीजीजी का भी विरोध किया है, जिसके लिए मूल समझौते से अलग हस्ताक्षर कराए गए हैं।
वितरकों ने जिलाधिकारी से मामले का संज्ञान लेकर दबाव बंद कराने और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।