सिंगहा में हाईमास्ट लाइट घोटाला: नियम तोड़ 43 लाख का भुगतान, प्रधान-सचिव पर कार्रवाई की संस्तुति
KUSHINAGAR NEWS: कुशीनगर जिले के एक गांव मे नियमो की अनदेखी कर केवल एक ही परियोजना पर प्रधान और सचिव के द्वारा नियम विरुद्ध तरिके से गांव मे 15 जगह स्ट्रेट लाइटों को 14 टुकड़ों में बांटकर टेंडर से बचाया गया जो शासनादेश की धज्जियां, उड़ाई गई साथ ही एक ही फर्म ओम श्री साई कंस्ट्रक्शन’ को पूरा काम मिला वो भी खण्ड खण्ड मे तोड़ कर इन मामलो का जाँच पहले एडिओ पंचायत को दिया गया दूसरी बार जिला पंचायत राज अधिकारी आलोक प्रियदर्शी ने स्वयं जाँच कर रिपोर्ट जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी को विगत 6 माह पहले दे दिया लेकिन अबतक इतने बड़े अनियमितता मामले मे कोई कार्रवाई नहीं किया गया जो जिला प्रशासन पर बड़ा सवाल है। मामला कुशीनगर जिले के नेबुआ नौरंगिया ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायत सिंगहा का है जहाँ एक ही परियोजना को ग्राम प्रधान सचिव ने तोड़ मरोड़ कर हाईमास्ट लाइट स्थापना के नाम पर कुल 43 लाख रुपये से अधिक के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। जिला पंचायत राज अधिकारी आलोक कुमार प्रियदर्शी की जांच आख्या में ग्राम प्रधान अमित कुमार शाही और ग्राम पंचायत अधिकारी बलजीत यादव को दोषी पाया गया है। प्रधान के विरुद्ध धारा 95(1)(जी) और सचिव के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति जिलाधिकारी मुख्य विकास अधिकारी को जाँच रिपोर्ट 6 माह पहले की गई लेकिन अबतक कोई कार्रवाई नहीं हुआ गांव मे कई टोले है जहाँ ग्रामीणों को चलने के लिए सही रास्ते नहीं जहाँ इंटरलाकिंग कार्य जरूरी था खड़ंजा जरूरी था लेकिन नहीं कराया गया।
सोशल मीडिया से उठा मामला: शिकायत सोशल मीडिया पर वायरल खबरों के बाद संज्ञान में आई। तत्काल ADO पंचायत नेबुआ नौरंगिया को प्रारंभिक जांच सौंपी गई। 01.09.2025 को प्रधान व सचिव को अभिलेखों सहित तलब किया गया।
कैसे हुआ घोटाला:
जांच में सामने आया कि ग्राम पंचायत सिंगहा में 5th State Finance Commission और XV Finance Commission की धनराशि से कुल 15 हाईमास्ट लाइटें लगाई गईं। इन पर कुल 43,01,627 रुपये खर्च किए गए। सवाल ये है कि इस तरह जिम्मेदारो के द्वारा नियमो को ताक पर रख कर केवल एक ही परियोजना पर काम किया गया तो अबतक कार्रवाई क्यों नहीं किया गया।
नियमों की अनदेखी के 3 बड़े सबूत:
1.परियोजना को तोड़ा: शासनादेश 1838/2015 के अनुसार एक ही परियोजना को कई भागों में नहीं तोड़ा जा सकता। यहां 15 लाइटों के काम को जानबूझकर 14 अलग-अलग वर्क आईडी में बांट दिया गया।
2.टेंडर से बचने का खेल: शासनादेश 58/2021 के तहत 10 लाख से ऊपर के कार्य पर DM व जिला पंचायत से वित्तीय-तकनीकी स्वीकृति और टेंडर जरूरी है। 43 लाख के काम को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर ADO पंचायत व JE स्तर से स्वीकृति ले ली गई।
3.एक ही फर्म को भुगतान: सभी 14 कार्यों का भुगतान एक ही फर्म ‘ओम श्री साई कंस्ट्रक्शन’ (TIN-09GLXPS3198R2ZA) को किया गया। कहां-कहां लगी लाइटें – खर्च का ब्योरा
स्थान धनराशि
डोमदारी कोट स्थान के पास ₹1,40,000 + ₹1,47,341
सिंगहा मेन चौराहा ₹2,80,000
बनारसी गुप्ता के घर के पास ₹2,87,330
अनवर के घर के पास पश्चिम पट्टी ₹2,87,330
फीरोज के घर के पास पश्चिम पट्टी ₹2,87,324
कन्हैया गुप्ता के घर के पास ₹2,87,324
पछेड़वा शंभू प्रसाद के घर पास ₹2,87,330
छितवनिया टोला वाजिद के घर पास ₹2,87,318
अनिल प्रसाद के घर के पास ₹2,87,330
पुरब पट्टी रामबृक्ष के घर पास ₹2,87,318
बजरी टोला कांता के घर पास ₹2,87,341 + ₹2,87,341
चावर टोला पप्पू शाही के घर पास ₹2,87,000
पुरब पट्टी हरिजन बस्ती ₹5,74,000
कुल 15 लाइट ₹43,01,627
जांच में और क्या मिला:
1. सक्षम स्तर से वित्तीय, प्रशासनिक व तकनीकी स्वीकृति नहीं ली गई।
2. विद्युत विभाग से हाईमास्ट लाइट हेतु अलग से कनेक्शन भी नहीं लिया गया।
3. 02 अगस्त 2024 को दैनिक जागरण में निविदा प्रकाशित कर ‘ओम श्री साई कंस्ट्रक्शन’ का चयन किया गया, लेकिन टेंडर प्रक्रिया सिर्फ दिखावे की थी।
क्या होगी कार्रवाई?
जिला पंचायत राज अधिकारी ने अपनी आख्या में स्पष्ट लिखा है कि ग्राम प्रधान अमित कुमार शाही के विरुद्ध उ0प्र0 पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 95(1)(जी) के अंतर्गत कार्यवाही और ग्राम पंचायत अधिकारी बलजीत यादव के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की संस्तुति की जाती है। आख्या डीएम व मुख्य विकास अधिकारी को भेज दी गई है।








