कानून का रखवाला या वर्दी वाला गुंडा? कुशीनगर में दीवान की करतूत वायरल
दीवान ने खबर चलाने की दी चुनौती, गालियों की बरसात, वायरल वीडियो से मचा बवाल
KUSHINAGAR NEWS: कानून की रक्षा का दायित्व जिन कंधों पर है, अगर वही कानून को अपनी जेब में रखकर चलने लगें तो लोकतंत्र की नींव हिलने लगती है। चौराखास थाना क्षेत्र के बड़हरा चौराहे से वायरल हुआ एक वीडियो खाकी के उसी बदरंग चेहरे को उजागर कर रहा है, जिसे देखकर आम आदमी के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर पुलिस जनता की रक्षक है या वर्दी के नशे में चूर कोई सडकछाप गुण्डा? आरोप है कि देर रात बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए फाल्ट ठीक करने जा रहे संविदा बिजली कर्मी को वाहन चेकिंग के नाम पर रोका गया। चेकिंग होती तो शायद कोई सवाल नहीं उठता, लेकिन वायरल वीडियो में जो भाषा सुनाई पड़ रही है, वह किसी जिम्मेदार पुलिसकर्मी की नहीं बल्कि सड़कछाप गुंडई की प्रतीत है। कथित तौर पर दीवान बृजकिशोर सिंह और साथ मौजूद होमगार्ड न सिर्फ गालियों की बौछार कर रहे हैं, बल्कि खबर चलवाने और “जो बिगाड़ना हो बिगाड़ लो” जैसी चुनौती भी देते दिखाई दे रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि दीवान बृजकिशोर सिंह ने किसके दम पर इतनी बेअंदाजी दिखा रहे है? क्या दीवान बृजकिशोर सिंह यह संदेश दे रहे है कि कानून केवल जनता के लिए है, खाकी के लिए नहीं?
गाली गलौज और धमकी

जिस कर्मचारी को अंधेरे में डूबे गांवों और कस्बों में रोशनी पहुंचाने की जिम्मेदारी निभानी थी, उसे रास्ते में खाकी के अहंकार का सामना करना पड़ा। दुर्भाग्य यह है कि आज कल दीवान बृजकिशोर सिंह जैसे वर्दीधारी कानून की भाषा कम और गाली-गलौज व धमकी की भाषा ज्यादा समझते नजर आ रहे हैं। जनता से संवाद की जगह अपमान, कर्तव्य की जगह दंभ और सेवा की जगह रसूख प्रदर्शन उनकी पहचान बनती जा रही है।
दीवान को कैमरे का भी खौफ नही
यह कोई साधारण घटना नहीं है। यह उस बीमारी का लक्षण है जो व्यवस्था के भीतर धीरे-धीरे घर करती जा रही है। जब वर्दी पहनने वाला व्यक्ति कैमरे के सामने ही मर्यादा भूल जाए, तो कैमरे के पीछे उसकी कार्यशैली कैसी होगी, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
विधि विशेषज्ञ बोले
हाईकोर्ट के अधिवक्ता जगदीश मोहन कहते है कि पुलिस विभाग को यह समझना होगा कि जनता करदाता है, गुलाम नहीं। सरकारी कर्मचारी शासन के सेवक हैं, शासक नहीं। सड़क पर खड़े होकर किसी व्यक्ति की इज्जत उतारना बहादुरी नहीं, बल्कि वर्दी की गरिमा का सार्वजनिक चीरहरण है।उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि सवाल एक दीवान के व्यवहार का नहीं है, सवाल पूरे सिस्टम की जवाबदेही का है। यदि वायरल वीडियो की सच्चाई वही है जो दिखाई दे रही है, तो यह केवल अनुशासनहीनता नहीं बल्कि पुलिस सेवा की मूल भावना के खिलाफ अपराध है।







