कोर्ट में मामला लंबित, फिर भी विवादित भूमि पर कब्जे की कोशिश का आरोप
MIRZAPUR NEWS: (सुनील कुमार गुप्ता) स्थानीय तहसील से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न केवल पैतृक संपत्ति विवाद को उजागर किया है, बल्कि रिश्तों की संवेदनशीलता और प्रशासनिक लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जनता दर्शन, समाधान दिवस और तहसील दिवस में बार-बार शिकायतों के बावजूद स्थानीय राजस्व निरीक्षक और पुलिस ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण विवादित भूमि पर कब्जे की कोशिश और तनाव लगातार बढ़ता गया। सूत्रों के अनुसार परिवार में चार पुत्र और दो पुत्रियां हैं। आरोप है कि वृद्ध मां की बीमारी के दौरान किसी भी पुत्र ने उनकी सेवा नहीं की। मां की देखभाल, इलाज और अंतिम समय तक सेवा की जिम्मेदारी एक विधवा पुत्री ने निभाई। इतना ही नहीं, मां के निधन के बाद अंतिम संस्कार, तेरहवीं और अन्य सभी धार्मिक संस्कारों की जिम्मेदारी भी दोनों पुत्रियों ने निभाई।लेकिन जैसे ही पैतृक संपत्ति के बंटवारे की बात आई, परिवार में विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि जो लोग मां की सेवा से दूर रहे, वही अब जमीन पर अपना अधिकार जताते हुए कब्जे की कोशिश कर रहे हैं।फरियादी पक्ष का आरोप है कि मां को आंख का इलाज कराने ले जाने के दौरान दो भाइयों ने कथित रूप से तीसरे और चौथे भाई के हिस्से का नामांतरण अपने पक्ष में करा लिया। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि मां की मृत्यु के कारण को दर्ज कराने वाले पक्ष को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है।जानकारी के अनुसार वाद संख्या 361/2026 सिविल न्यायालय चुनार में विचाराधीन है। इसके बावजूद आरोप है कि विपक्षी पक्ष विवादित भूमि पर जोताई-बोआई और कब्जे जैसी गतिविधियां करने का प्रयास कर रहा था, जिससे गांव में तनाव बढ़ गया।मामले की सुनवाई के दौरान एडीएम नमामि गंगे विजेता सिंह ने स्थानीय राजस्व निरीक्षक और संबंधित अधिकारियों के कार्यों पर नाराजगी जताते हुए कड़ी फटकार लगाई थी। फरियादी ने मांग की कि न्यायालय के अंतिम निर्णय तक विपक्षी पक्ष को विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार की गतिविधि करने से रोका जाए।एडीएम ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि अगले तीन दिनों तक विवादित भूमि पर कोई भी पक्ष किसी प्रकार की गतिविधि नहीं करेगा। वहीं एसडीएम चुनार ने भी दोनों पक्षों को चेतावनी देते हुए कहा कि न्यायालय के अंतिम आदेश तक यथास्थिति बनाए रखना अनिवार्य होगा।ग्रामीणों का कहना है कि यदि शुरुआती शिकायतों पर ही राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस ने निष्पक्ष एवं समयबद्ध कार्रवाई की होती तो मामला इतना गंभीर नहीं बनता। अब यह विवाद केवल जमीन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि परिवार के रिश्तों में गहरी खाई पैदा कर चुका है।







