Home उत्तर प्रदेश खनकते हैं घुंघरू, पर दर्द है उसमें…….

खनकते हैं घुंघरू, पर दर्द है उसमें…….

MIRZAPUR NEWS: (अमरेश चन्द्र पाण्डेय)  “त्रिमुहानी” मुहल्ला, शहर का रेड लाइट एरिमा माना जाता है। यहां पहले सैकड़ों की संख्या में तवायफें रहती थीं। अब नाम मात्र की तवायफें, रह गयी है। राजे-रजवाड़े अब रहे नहीं तो उनकी कद्र करने वाला कोई रहा नहीं। बचे हैं, शहर के रईसजादे जो यदा-कदा मोजरा सुनने चले आते है किन्तु मोजरा कम उनकी नजर में हवस ज्यादा होती है। शाम ढलते ढलते बाजार में रौनक शुरु हो जाती है और अंधेरा होते-होते हारमुनियम तवला की थाप व घुंघस की मधुर आवाज से पूरा त्रिमुहानी रंगीन बन जाता है। उस दिन में अपने सहयोगी रिपोर्टर के साथ उधर से गुजर रहा था तभी सहयोगी के जिज्ञासा व्यक्त करने पर मैं भी सीढ़ी से कोठे पर चढ़ गया। मोजरे का आनन्द लेने वाले मसनस लगाये बैठे थे। तवायफ (नाम देना उचित नहीं है) मोजरे के लिये तैयार हो रही थी। मेकअप आदि करके पैर में घूंघट बांध रही थीं तभी मैने जिज्ञासा बस उससे सवाल कर दिया- आपने जो घुंघरू बांध रखा है यह आपका शौक है, या इसके पीछे कोई मजबूरी। उत्तर- मजबूरी ही समझ लिजिये। पूछा, आपने कभी किसी से प्यार किया है? उत्तर-प्यार करने का ही नतीजा है, जो आज कोठे पर हूं। पूछा, मान लीजिये कोई आपके पास आये आपसे शादी करके घर ले जाना चाहे तो क्या आप इस गलीच जिन्दगी छोड़कर गृहिणी बनना पसन्द करेगी? उत्तर-आपका सवाल ही गलत है। भला हम तवायकों से कौन शारी करेगा? पूछा, आपकी मांग में सिन्दूर नहीं है लेकिन बच्चे हैं, तो इस बच्चों का पिता कौन हैं? उत्तर-यहां बच्चों के पिता गुमनाम होते हैं। यहां जो भी आते हैं, सब अन्धेरे के मदद गार आते हैं। पूछा, कोई व्यक्ति बारात में नाचने के लिये सट्टा करने आता है तो सट्टे के पैसे में क्या आप बारात मालिक के साथ एक रात सोने के के लिये विवश रहती है ? उत्तर- विल्कुल नहीं। गांव-गिराव में यह भ्रम फैलाया गया है। सट्टा करते समय हम अपनी सुरक्षा की पूरी गारंटी मांगती हूं। पूछा, हर तवायकें शहर के किसी न किसी रईसजादों की रखेल होती है, इसमें कित‌नी सच्चाई है? उत्तर- यह पूरी तरह सत्य है। तब पूछा, तब तो आपभी किसी की रखैल होंगी? उत्तर- हां, मैं भी हूं।नाम नहीं बताना चाहिये, लेकिन मैं आपसे इतना प्रभावित हूं कि आप कहें तो मैं उसका नाम भी बता दूं। दीवार पर फ्रेम में टंगे एक फोटो दिखाते हुए उसने कहा, यह मेरे लड़के का फोटो है। यह स्नातक प्रथम वर्ष का के. वी.पी.जी. कालेज का छात्र था।एक दिन इसने कहा, मां-मैं थानेदार बनूगा। मैने कहा, तू अपनी तैयारी कर मैं पैसे की कमी नहीं होने दूंगी। इसके लिये, इस शहर को छोड़कर दूसरे शहर में जाकर गुमनाम धंधा कर रही थी, कि इसके दोस्त इसे ताना न मारें कि इसकी मां वेश्या है, तवायफ है। लेकिन खुदा को मंजूर नहीं था और मात्र तीन दिन के बुखार में खुदा के पास चल बसा…….. कहकर दोनों हाथों से चेहरे को ढंककर सिसकने लगी ।माहौल पूरी तरह ग़मगीन हो गया। सवाल कुछ और तैर रहे थे लेकिन उसके सिसकियों के चलते कुछ पूछने का साहस न जुटा सका और विदा लेकर सीढ़ीया उतर गया।