द रैट रेस’ और ‘16 लेसन्स आई लर्न्ट फ्रॉम द महाभारत’ की लेखिका ने जनसहभागिता आधारित मॉडल सुझाया’
VARANASI NEWS: काशी की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए छात्रा एवं युवा लेखिका रैना कपूर ने शहर में पक्षियों के लिए स्थायी दाना-पानी केंद्र स्थापित किए जाने का प्रस्ताव वाराणसी नगर निगम को सौंपा है। अपनी पुस्तकों ‘ज्ीम त्ंज त्ंबम’ तथा ‘16 स्मेेवदे प् स्मंतदज तिवउ जीम डंींइींतंजं’ के लिए चर्चित रैना कपूर ने नगर निगम के महापौर अशोक तिवारी को विस्तृत ज्ञापन देकर पक्षियों के संरक्षण एवं उनके लिए भोजन तथा जल की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु नगर में एक निर्धारित सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराने की मांग की है। महापौर को सौंपे गए प्रस्ताव पत्र में रैना कपूर ने कहा है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, निर्माण गतिविधियों, हरित क्षेत्रों में कमी तथा प्राकृतिक आवासों के लगातार सिमटने के कारण पक्षियों के समक्ष भोजन और पानी का संकट उत्पन्न हो रहा है। ऐसे में नगर प्रशासन द्वारा एक सुव्यवस्थित सार्वजनिक स्थल विकसित कर पक्षियों के संरक्षण की दिशा में सार्थक कदम उठाया जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि नगर के किसी पार्क, खुले सार्वजनिक स्थान अथवा उपयुक्त सरकारी भूमि के छोटे हिस्से को पक्षियों के लिए दाना-पानी केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। प्रस्ताव में इस बात पर भी बल दिया गया है कि काशी केवल धार्मिक नगरी ही नहीं बल्कि करुणा, सेवा, सह-अस्तित्व और प्रकृति के प्रति सम्मान की जीवंत परंपरा का प्रतीक है। ऐसे में पक्षियों के संरक्षण से जुड़ी यह पहल नगरवासियों को पर्यावरण के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने के साथ-साथ जीव-जंतुओं के प्रति दायित्वबोध भी विकसित करेगी। रैना कपूर ने कहा कि यदि इस व्यवस्था को जनसहभागिता से जोड़ा जाए तो नागरिक स्वेच्छा से दाना एवं जल उपलब्ध कराने के अभियान में सहभागी बन सकते हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि दाना-पानी केंद्रों के संचालन के लिए स्वच्छता, रखरखाव और पर्यावरणीय मानकों से संबंधित स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित किए जाएं, ताकि यह व्यवस्था दीर्घकालिक और प्रभावी साबित हो सके। उनके अनुसार यह पहल न केवल पक्षियों के संरक्षण में सहायक होगी, बल्कि नागरिकों को प्रकृति से जोड़ने और पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाने का भी माध्यम बनेगी। पर्यावरण संरक्षण और जनसहभागिता पर आधारित इस प्रस्ताव को काशी की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं के अनुरूप एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है। नगर में यदि इस प्रकार के दाना-पानी केंद्र स्थापित होते हैं तो इससे पक्षियों के संरक्षण के साथ-साथ वाराणसी की हरित एवं संवेदनशील पहचान को भी नई मजबूती मिल सकती है। रैना कपूर की इस पहल को सामाजिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से एक रचनात्मक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य में नागरिक भागीदारी के नए मॉडल की आधारशिला बन सकता है।







