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कर्बला के सबसे छोटे शहीद व छह माह के अली असगर की याद में निकला झूले का जुलूस

अली असगर का झूला देख बिलख पड़े अजादार

MIRZAPUR NEWS: (शाहिद वारसी) मोहर्रम की तीसरी तारीख शुक्रवार की देर रात कर्बला के सबसे छोटे शहीद हजरत अली असगर अलैहिस्सलाम की याद में कुरैश नगर से झूले का जुलूस निकाला गया। जुलूस निकालने से पहले मजलिस का आयोजन किया गया, जिसमें हजरत अली असगर अलैहिस्सलाम के मसायब बयान किए गए। मसायब सुनकर अजादार फफक-फफक कर रोने लगे। जब हजरत अली असगर अलैहिस्सलाम का झूला कर्बला की ओर उठाया गया तो वहां मौजूद महिलाओं, पुरुषों, बच्चों और बुजुर्गों सभी की आंखें नम हो गईं। पूरे रास्ते अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ पड़ा। चारों तरफ या हुसैन, या हुसैन की सदाएं बुलंद हो रही थीं। झूले की जियारत और बोसा लेने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। कोई दूध बांट रहा था तो कोई सबील लगा रहा था। पूरे रास्ते यही सिलसिला चलता रहा। शिया समुदाय के लोग नौहाख्वानी और सीनाजनी करते हुए जुलूस में शामिल रहे। हजरत अली असगर अलैहिस्सलाम की शहादत को याद कर अजादार बिलख पड़े। लोग झूले को देखकर दुआएं मांगते और अपनी मन्नतें पेश करते रहे। जैसे ही झूला कर्बला में दाखिल हुआ, अजादार झूले को पकड़कर रोने लगे। वहां मौजूद महिलाएं भी गम में रो पड़ीं। कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के छह माह के मासूम बेटे हजरत अली असगर अलैहिस्सलाम की कुर्बानी दिल दहला देने वाली थी। वे कैसे मुसलमान थे, जिन्होंने पानी पिलाने के बजाय छह माह के बच्चे का कत्ल करना गवारा किया। कर्बला में जब कई दिनों से पानी बंद था और खेमों में बच्चों की प्यास बढ़ती जा रही थी, तब छह माह के मासूम मौला अली असगर अलैहिस्सलाम भी झूले में तड़प रहे थे। 10 मोहर्रम को जब सय्यदे सज्जाद के अलावा इमाम तन्हा मैदान में थे, तो खेमों से रोने की आवाजें सुनकर वहां तशरीफ लाए। पता चला कि इमाम की हल मिन नासिरिन यनसुरुना की सदा सुनकर हजरत अली असगर ने खुद को झूले से गिरा दिया। अपने मासूम बच्चे को देखकर मौला उसकी मां से बोले कि लाओ, इसे पानी पिला लाएं। आशूरा के दिन इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम अपने मासूम बेटे को गोद में लेकर मैदान में आए और अली असगर को हाथों पर बुलंद कर यजीदी फौज से कहा कि यह छह माह का बच्चा प्यासा है, इसे पानी पिला दो। यदि मुझसे दुश्मनी है तो इस मासूम बच्चे का क्या कसूर है। यदि तुम्हें मुझ पर रहम नहीं आता तो कम से कम इस बच्चे को एक घूंट पानी दे दो।
इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम बोल रहे थे और मौला अली असगर प्यास की वजह से अपने सूखे होंठों पर जुबान फेर रहे थे। यह मंजर देखकर भी यजीदी फौज का दिल नहीं पसीजा। पानी की जगह तीर तैयार हुआ। यजीदी फौज की तरफ से हुरमुला ने कमान खींची और ऐसा तीर चलाया कि मासूम का नन्हा सा गला छलनी हो गया। अपने बाबा मौला हुसैन अलैहिस्सलाम की गोद में अली असगर शहीद हो गए। इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अपने लख्ते जिगर को सीने से लगाया, आसमान की तरफ देखा और सब्र किया। जुलूस कुरैश नगर से उठकर तरकापुर, वासलीगंज, बाटा चौराहा, घंटाघर, बसनही बाजार, त्रिमोहानी, टेढ़ी नीम, नारघाट और बल्ली का अड्डा होते हुए अपने पुराने मार्ग से इमामबाड़ा स्थित कर्बला पहुंचकर संपन्न हुआ। शहर कोतवाल दयाशंकर ओझा अपने हमराहियों के साथ मुस्तैद दिखाई दिए। उन्होंने यातायात व्यवस्था को बाधित नहीं होने दिया। पुलिस प्रशासन के सहयोग से जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।