सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर जनता भड़की, प्रशासन से लगाई जांच की गुहार
JALAUN NEWS: राजकीय मेडिकल कॉलेज के सामने और कान्हा हॉस्पिटल के निकट लगी एक बड़ी प्रदर्शनी ने जनपद जालौन में अचानक हलचल मचा दी है। बिना अनुमति शुरू हुई इस नुमाइश को लेकर शहरवासियों में नाराजगी तेज हो गई है। प्रदर्शनी के मुख्य द्वार के डिजाइन, अंदर बने डेकोरेशन, सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी और नियमों के खुले उल्लंघन ने लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मेन गेट के डिजाइन पर उठे सवाल, स्थानीय लोगों ने जताई आपत्ति
रविवार को प्रदर्शनी खुलते ही सबसे ज्यादा चर्चा इसके भव्य मेन गेट को लेकर शुरू हो गई। द्वार पर बने एक खास शैली के ढांचे ने तमाम लोगों का ध्यान खींचा। कई नागरिकों ने कहा कि सार्वजनिक आयोजन में ऐसा डिजाइन क्यों चुना गया, इसका उद्देश्य क्या है और आखिर बिना अनुमति ऐसी संरचना कैसे खड़ी कर दी गई। लोगों ने बताया कि जैसे ही उद्घाटन के लिए जनप्रतिनिधियों को बुलाया गया, गेट के सामने ही फीता काटने की प्रक्रिया की गई। इस दौरान परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन न होने को लेकर भी कुछ लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि सार्वजनिक आयोजनों में परंपरा और कानूनी मानकों, दोनों का पालन होना आवश्यक है।
अंदर बने थीम-सेक्शन भी विवाद का कारण
प्रदर्शनी के अंदर बनाए गए विभिन्न दृश्य भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। कुछ स्टॉल और बैकड्रॉप यूरोपीय आर्ट-वर्क व पुरानी इमारतों की कलात्मक शैली पर आधारित हैं, जिनको लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई है। कई लोगों ने कहा कि यह स्थानीय संस्कृति, परंपरा और सामान्य प्रदर्शनी से बिल्कुल अलग है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। इसके अतिरिक्त बर्फीले पहाड़ी इलाके और उत्सव-थीम वाले सेट-अप भी लगाए गए हैं, जिन्हें देखकर लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी कलाकृतियाँ इस प्रदर्शनी का हिस्सा किस उद्देश्य से बनाई गई हैं।
बिना अनुमति शुरू हुई नुमाइश? प्रशासन की भूमिका पर प्रश्नचिह्न
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि प्रदर्शनी किसके आदेश पर शुरू की गई। सूत्रों के अनुसार, अभी तक इस नुमाइश के लिए प्रशासन से कोई औपचारिक अनुमति जारी नहीं हुई है। इसके बावजूद भारी भीड़ वाले इलाके में बड़े पैमाने पर आयोजन शुरू कर दिया गया है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से पूछा है कि बिना NOC के आयोजन कैसे चालू हो गया? किस अधिकारी ने स्थल निरीक्षण किया? और सुरक्षा मानकों की जांच किसने की?
सुरक्षा व्यवस्था बदहाल—अग्निशमन सिस्टम तक नहीं
सबसे गंभीर मामला प्रदर्शनी में सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी का है
शिकायतों के अनुसार
अग्निशमन के लिए पानी की टंकी या हाइड्रेंट उपलब्ध नहीं
मिट्टी-बालू भी नहीं रखा गया, जो आपात स्थिति में अनिवार्य है
फायर ब्रिगेड की NOC नहीं जारी, फिर भी राइड और स्टॉल चालू भीड़भाड़ वाले प्रवेश-द्वार पर एग्जिट प्लान नहीं
स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले वर्ष रामेश्वर चौराहा क्षेत्र में लगी प्रदर्शनी में एक युवक झूले से गिरकर बुरी तरह घायल हो गया था, जिसके बाद नुमाइश बंद कर दी गई थी। इसके बावजूद इस साल फिर बिना फिटनेस प्रमाणपत्र के झूले चलाए जा रहे हैं।
पार्किंग व्यवस्था में अराजकता, मनमाना शुल्क वसूली का आरोप
प्रदर्शनी के बाहर पार्किंग को लेकर भी भारी अव्यवस्था देखी जा रही है
लोगों ने आरोप लगाया कि
पार्किंग का कोई आधिकारिक परमिट नहीं, फिर भी शुल्क वसूला जा रहा है
वाहन खड़ा करने की सुरक्षा व्यवस्था नहीं
भीड़भाड़ के समय जाम की स्थिति बन रही है
शहरवासियों का कहना है कि बिना लाइसेंस संचालन यातायात नियमों का उल्लंघन है और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
शहर में बढ़ी चर्चाएं, प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
प्रदर्शनी का स्वरूप, सुरक्षा व्यवस्था और बिना अनुमति संचालन को लेकर शहरभर में चर्चा तेज है। सोशल मीडिया पर अनेकों पोस्ट वायरल हो रही हैं, जिनमें आयोजन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई संगठनों और नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि
1 तुरंत प्रदर्शनी की जांच की जाए
2 अनुमति पत्र, NOC, और सुरक्षा दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं
3 झूलों और बिजली व्यवस्था की तकनीकी जांच हो
4 बिना अनुमति शुल्क वसूली बंद कराई जाए
5 मानकों के अनुरूप न पाए जाने पर प्रदर्शनी बंद कराई जाए
अधिकारियों की चुप्पी बनी पहेली
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी प्रदर्शनी के बावजूद संबंधित विभागों की ओर से कोई स्पष्ट बयान क्यों नहीं आया।
न नगर पालिका, न जिला प्रशासन, न पुलिस—किसी भी विभाग ने अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की ,कि अनुमति दी गई है या नहीं।
जनता का कहना है कि यदि वास्तव में अनुमति नहीं दी गई है, तो यह खुला कानून उल्लंघन है। और यदि अनुमति दी गई है, तो दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाए ताकि भ्रम समाप्त हो सके।
निष्कर्ष
उरई शहर में लगी यह प्रदर्शनी अब सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि जनपद के प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों की पारदर्शिता का बड़ा सवाल बन चुकी है। बिना अनुमति संचालन, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अव्यवस्था के कारण लोग नाराज हैं और प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
नागरिकों का कहना है कि—
सार्वजनिक स्थान पर लगने वाली हर प्रदर्शनी पारदर्शिता, अनुमति, परंपरा और सुरक्षा मानकों के साथ ही संचालित होनी चाहिए। किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।







