हस्तक्षेप से इंकार, जनहित याचिका खारिज
PRAYAGRAJ NEWS: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि एक ही विषय पर बार-बार शिकायतें दर्ज करने और अधिकारियों द्वारा जांच किए जाने के बावजूद जनहित याचिकाएं दायर करना स्वीकार्य नहीं है। अधिकारियों द्वारा जांच शिकायतकर्ता को संतुष्ट करने के लिए नहीं की जाती, बल्कि यह जांचने के लिए की जाती है कि लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई है या नहीं। जांच के बाद यदि कोई गड़बड़ी नहीं पाई जाती है, तो बार-बार आरोप लगाना और उसके लिए बार-बार याचिकाएं दायर करना जनहित याचिका के अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग है, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार भंसाली तथा न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने पंचायत राज विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी मोतीलाल सिंह की जनहित याचिका खारिज कर दी है। याची ने पहले पांच अक्टूबर 2023 को शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने अधिकारियों को तीन महीने के भीतर शिकायत की जांच करने का निर्देश दिया। जांच के लिए बनाई गई समिति ने पाया कि शिकायत में लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं हुए। इसके बाद याची ने फिर शिकायत की तो दोबारा जांच की गई लेकिन आरोप असत्य पाए गए। अगस्त 2025 में नई शिकायत में पुराने आरोप दोहराए गए। कोर्ट ने कहा, शिकायत की समीक्षा करने पर यह स्पष्ट होता है कि इसमें पूर्व की दो जांचों का कोई उल्लेख नहीं है, जबकि उन जांच रिपोर्टों की प्रतियां याची के पास हैं। यदि जांच के बाद कोई गड़बड़ी नहीं पाई जाती है, तो बार-बार आरोप लगाना और याचिकाएं दायर करना जनहित याचिका के दायरे का दुरुपयोग है।







