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सांसद प्रमोद तिवारी से जुड़े मानहानि के केस में परिवाद दर्ज करने का आदेश

सुनवाई में पुलिस विवेचना को लेकर कोर्ट का तेवर सख्त, पुलिस एफआर को किया निरस्त
PRATAPGARH NEWS: सांसद से जुड़े मानहानि के केस में पुलिस द्वारा विवेचना में अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने को लेकर कोर्ट ने सख्त रूख अख्तियार किया है। कोर्ट ने पुलिस द्वारा इस मामले मे दाखिल की गयी अंतिम रिपोर्ट को निरस्त करते हुए इसे परिवाद के रूप में दर्ज किये जाने का फैसला सुनाया है। राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी को लेकर उदयपुर थाना के ओमप्रकाश पाण्डेय उर्फ गुडडू का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। इसे आपत्तिजनक ठहराते हुए सांसद के मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल ने तत्कालीन एसपी को शिकायती पत्र देकर एफआईआर दर्ज कराने की गुहार की थी। पुलिस द्वारा जांच के नाम पर कार्रवाई न करने को लेकर ज्ञानप्रकाश शुक्ल ने लालगंज सिविल कोर्ट में फरियाद की। सिविल कोर्ट में मामले की सुनवाई करते हुए तत्कालीन न्यायिक मजिस्टेªट अरविंद सिंह ने बीते वर्ष 2024 में छब्बीस जुलाई को लालगंज पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिये। कोर्ट की फटकार पर लालगंज पुलिस द्वारा बीते वर्ष 2024 में पहली अगस्त को उदयपुर थाना के कुम्भीआइमा निवासी ओमप्रकाश पाण्डेय उर्फ गुडडू के खिलाफ मानहानि व लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम एवं आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की। पुलिस द्वारा केस को लेकर विवेचना के तहत इस मामले में बीते वर्ष पन्द्रह अगस्त 2025 को मामले को समाप्त करते हुए कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दिया गया। इससे असंतुष्ट ज्ञानप्रकाश शुक्ल ने जरिये अधिवक्ता कोर्ट में दस्तावेजी साक्ष्यों की पुलिस द्वारा अवहेलना को लेकर आपत्ति दाखिल की। मामले की सुनवाई करते हुए लालगंज अपर मुख्य न्यायिक मजिस्टेªट विराटमणि त्रिपाठी ने छः अप्रैल को जारी आदेश में पुलिस की अंतिम रिपोर्ट पर कड़ा रूख अख्तियार करते हुए इसे निरस्त कर दिया। एसीजेएम कोर्ट ने मामले में कोर्ट में परिवाद दर्ज कर अग्रेतर कार्रवाई के आदेश पारित किये हैं।