अब बहुत हो गया… : जंतर-मंतर के छात्र आंदोलन की गूंज फतेहपुर तक, युवाओं ने बुलंद की आवाज
– पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता और रोजगार के मुद्दे पर छात्रों में उबाल, दिल्ली के आंदोलन को बताया पूरे देश के युवाओं की लड़ाई
– फतेहपुर के छात्र-छात्राओं ने कहा – वर्षों की मेहनत पर बार-बार फिर जाता है पानी, अब व्यवस्था में बदलाव का समय आ गया है
FATEHPUR NEWS: (शीबू खान) देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी, पारदर्शिता की कमी और बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ चल रहे छात्रों एवं युवाओं के आंदोलन की गूंज अब जनपद फतेहपुर में भी सुनाई देने लगी है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों और युवाओं ने आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि यह किसी एक राज्य या एक भर्ती परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य और विश्वास से जुड़ा हुआ विषय है। युवाओं का कहना है कि वे वर्षों तक कठिन परिश्रम कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से उनका साथ देता है, लेकिन जब परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो जाता है, परीक्षा निरस्त कर दी जाती है या भर्ती प्रक्रिया वर्षों तक अधर में लटक जाती है तो सबसे बड़ा नुकसान अभ्यर्थियों का होता है। उनका कहना है कि इससे न केवल समय और धन की बर्बादी होती है, बल्कि युवाओं का आत्मविश्वास भी टूटता है। फतेहपुर के युवाओं ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्र किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि अपने भविष्य, अपने अधिकार और निष्पक्ष व्यवस्था की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में पूरे देश के युवाओं का नैतिक समर्थन उनके साथ है। बताना जरुरी होगा कि जनपद के कई छात्र और युवा दिल्ली के जंतर – मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में शामिल हैं और जिले के हर युवा, छात्र और बेरोजगारों का प्रतिनिधित्व भी कर रहे हैं। जिले और विशेष रूप से शहर के युवाओं की जुबान पर इस समय मशहूर शायर दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियां भी बार-बार सुनाई दे रही हैं— “हो गई है पीर पर्वत-सी, पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।” युवाओं का कहना है कि यह कविता आज के हालात पर बिल्कुल सटीक बैठती है और व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता को दर्शाती है। फतेहपुर के युवाओं ने केंद्र एवं राज्य सरकारों से मांग की है कि प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए, पेपर लीक कराने वाले गिरोहों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई हो, दोषियों की संपत्ति जब्त कर उन्हें कड़ी सजा दी जाए, समयबद्ध भर्ती कैलेंडर जारी किया जाए, परीक्षा परिणाम और नियुक्तियां तय समय पर पूरी हों तथा भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब समाप्त किया जाए। उनका कहना है कि यदि युवाओं को समय पर रोजगार और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था मिलेगी तो देश की ऊर्जा सही दिशा में आगे बढ़ेगी।
फतेहपुर के युवाओं की प्रतिक्रिया:
1. वीर सिंह (प्रतियोगी छात्र)
“हम पिछले चार वर्षों से लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। हर परीक्षा के समय यही डर रहता है कि कहीं पेपर लीक न हो जाए। जब परीक्षा निरस्त होती है तो ऐसा लगता है कि हमारी सालों साल की मेहनत एक झटके में खत्म हो गई। सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए कि भविष्य में कोई भी पेपर लीक न हो सके।”
2. ख़ुशी यादव (प्रतियोगी छात्रा)
“जिस तरह से आज दिल्ली में लगातार छात्रों के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है, ऐसा नहीं होना चाहिए। जिस तरह से हमारी बहनों के साथ लगातार दुर्व्यवहार किया जा रहा है, ऐसा नहीं होना चाहिए। क्या यही हमारे देश की संस्कृति है? मेरी आपसे यही विनती है कि आप शिक्षा के क्षेत्र में कड़ा से कड़ा कदम उठाएँ और शिक्षा को सबसे ऊपर रखा जाए। और मैं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जी से कहती हूँ कि अगर आप इस पद को नहीं संभाल पा रहे हैं तो आपको इस पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। आप इस पद से इस्तीफा दीजिए।”
3. अमित सिंह (नीट प्रतियोगी छात्र)
“पेपर लीक केवल एक अपराध नहीं बल्कि लाखों परिवारों के सपनों के साथ खिलवाड़ है। ऐसे अपराधियों के खिलाफ आजीवन कठोर कार्रवाई होनी चाहिए ताकि दोबारा कोई ऐसी हिम्मत न कर सके।”
4. निशा (छात्रा)
“हम लड़कियां भी दिन-रात मेहनत करती हैं। परिवार हम पर भरोसा करता है, लेकिन जब भर्ती रद्द होती है तो सबसे ज्यादा निराशा हमें होती है। दिल्ली में जो छात्र आंदोलन कर रहे हैं, वे हमारी भी आवाज उठा रहे हैं।”
5. राघवेंद्र सिंह (प्रतियोगी छात्र)
“छात्रों के हित और भविष्य में उनके साथ परीक्षाओं में कोई खिलवाड़ नहीं होना चाहिए, ये सरकार की जिम्मेदारी है अगर परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो सरकार को आगे आना चाहिए और इस विषय में बात करना चाहिए, जंतर मंतर दिल्ली में हुई छात्रों पर लाठी चार्ज दुर्भाग्य पूर्ण है।”
‘अब बहुत हो गया’—एक सुर में बोले छात्र-युवा
फतेहपुर के युवाओं ने कहा कि वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थी मानसिक, आर्थिक और सामाजिक दबाव का सामना कर रहे हैं। लगातार परीक्षा तिथियों में बदलाव, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस और प्रभावी कदम उठाने का समय आ गया है। युवाओं का कहना है कि वे किसी टकराव की राजनीति नहीं, बल्कि निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और समयबद्ध रोजगार चाहते हैं। उनका मानना है कि यदि सरकार युवाओं की बात गंभीरता से सुनकर प्रभावी सुधार लागू करती है तो इससे न केवल युवाओं का विश्वास लौटेगा बल्कि देश की प्रतिभा को भी नई दिशा मिलेगी। जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के समर्थन में फतेहपुर के युवाओं ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी आवाज को सुनेगी, प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाएगी और आने वाले समय में ऐसी व्यवस्था विकसित करेगी जिसमें मेहनत करने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी को निष्पक्ष अवसर मिल सके।







