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बिजली विभाग में ‘भर्ती घोटाले’ पर अफसरों ने साधी चुप्पी: डेढ़-दो लाख लेकर हुई नियुक्ति का आरोप, जांच तक शुरू नहीं

KUSHINAGAR NEWS: बिजली विभाग में कम्प्यूटर ऑपरेटर की भर्ती में धांधली के आरोपों पर अफसरों की खामोशी संदेह बढ़ा रही है। ‘युगान्धर टाइम्स’ की खबर के मुताबिक पडरौना समेत जिले के कई विद्युत उपकेंद्रों पर बिना विज्ञापन, बिना मेरिट लिस्ट के नियुक्तियां कर दी गईं। आरोप है कि हर अभ्यर्थी से डेढ़ से दो लाख रुपये वसूले गए।
न विज्ञापन, न मेरिट, फिर भी हो गई भर्ती
सूत्रों का दावा है कि एक निजी कंपनी के जरिए ये नियुक्तियां की गईं। न कोई सार्वजनिक विज्ञापन निकला, न आवेदन मांगे गए और न ही चयन समिति की जानकारी दी गई। मीडिया में मामला उजागर होने के बाद भी न जांच समिति बनी, न विभाग ने कोई स्पष्टीकरण दिया।
आरोप सच हैं तो रिकॉर्ड सार्वजनिक करें
बेरोजगार युवाओं में आक्रोश है। उनका सवाल है- अगर भर्ती नियम से हुई तो विभाग विज्ञापन, आवेदन संख्या, चयन का आधार और कमेटी के नाम सार्वजनिक क्यों नहीं कर रहा? भर्ती दस्तावेज दिखाने में हिचक क्यों है?
बड़े नामों के फंसने का डर?
चर्चा है कि मामला सिर्फ कुछ नियुक्तियों का नहीं है। निष्पक्ष जांच हुई तो कई बड़े अफसरों और रसूखदारों के नाम सामने आ सकते हैं। इसी डर से फाइलें दबाने की कोशिश हो रही है। विभाग और प्रशासन की चुप्पी से यही आशंका गहरा रही है।
युवाओं का व्यवस्था से उठ रहा भरोसा
स्थानीय युवाओं का कहना है कि जब नौकरी पैसे से मिले और शिकायत पर भी कार्रवाई न हो, तो सिस्टम से भरोसा टूटना लाजमी है। अब मांग उठ रही है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और भर्ती निरस्त कर पारदर्शी तरीके से दोबारा कराई जाए।