PRAYAGRAJ NEWS: करेली के जमीर नगर, करेलाबाग और बी-ब्लॉक क्षेत्र से होकर गुजरने वाला घाघरा नाला इन दिनों स्थानीय नागरिकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। नाले में जमा सिल्ट, प्लास्टिक, घरेलू कचरे और अन्य अपशिष्ट पदार्थों ने इसे लगभग कचरा घर में बदल दिया है। स्थिति यह है कि नाले से उठने वाली दुर्गंध और गंदगी के कारण आसपास रहने वाले सैकड़ों परिवारों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार घाघरा नाला केवल आसपास के इलाकों का कचरा ही नहीं ढोता, बल्कि शहर के विभिन्न हिस्सों से कई किलोमीटर दूर बहकर आने वाला कूड़ा-कचरा भी इसी क्षेत्र में आकर जमा हो जाता है। समय पर सफाई और सिल्ट निकासी न होने के कारण नाले की जल निकासी क्षमता लगातार कम होती जा रही है। बरसात का मौसम शुरू होने के साथ ही लोगों की चिंताएं और बढ़ गई हैं, क्योंकि जलभराव की आशंका पहले से कहीं अधिक दिखाई दे रही है। नाले के किनारे रहने वाले परिवारों का कहना है कि दुर्गंध के कारण खिड़कियां और दरवाजे खोलना मुश्किल हो गया है। शाम होते ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। लोगों को डर है कि यदि जल्द सफाई नहीं हुई तो डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियां फैल सकती हैं। क्षेत्रवासियों की चिंता का एक और कारण हाल की वह घटना है, जब इलाके के कई घरों में नल के पानी में सीवर और नाले का दूषित पानी मिलने की शिकायतें सामने आई थीं। उस दौरान लोगों को लंबे समय तक स्वच्छ पेयजल के लिए संघर्ष करना पड़ा था। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि नालों की नियमित सफाई और रखरखाव नहीं किया गया तो ऐसी समस्याएं दोबारा उत्पन्न हो सकती हैं। सामाजिक कार्यकर्ता शीकेब सिद्दीकी का कहना है कि नागरिकों ने अपनी समस्याओं से प्रशासन को कई बार अवगत कराया है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्रवासी सामूहिक रूप से अपनी मांगों को जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के समक्ष रखने के लिए बाध्य होंगे। स्थानीय लोगों ने प्रयागराज के महापौर, क्षेत्रीय विधायक और सांसद से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि वे स्वयं मौके का निरीक्षण करें और नगर निगम के साथ समन्वय स्थापित कर इस समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित कराएं। नागरिकों की प्रमुख मांग है कि घाघरा नाले की तत्काल सफाई कराई जाए, जमा सिल्ट हटाई जाए, नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था बनाई जाए और नाले में कचरा फेंकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
घाघरा नाले की यह तस्वीर केवल एक नाले की कहानी नहीं है, बल्कि शहरी स्वच्छता, जनस्वास्थ्य और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े उन सवालों को भी सामने लाती है, जिनका समाधान समय रहते किया जाना आवश्यक है। बरसात के मौसम से पहले यदि प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकती है।
पूर्व अपर महाधिवक्ता कमरुल हसन का कहना है कि यह समस्या केवल सफाई व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। उनके अनुसार नगर निगम को तत्काल प्रभाव से नाले की व्यापक सफाई कराकर स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
स्थानीय निवासी सरफराज हुसैन बताते हैं कि कई बार शिकायतों के बावजूद हालात में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ। वहीं रियाज सिद्दीकी का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों को बार-बार अवगत कराने के बावजूद समस्या के समाधान के लिए अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई।
स्थानीय निवासी एहतिशाम अहमद के अनुसार नाले से उठने वाली बदबू के कारण लोगों का घरों में रहना कठिन हो गया है। वहीं रेशमा खातून कहती हैं कि क्षेत्र के बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हैं और लोगों में बीमारी फैलने का डर बना हुआ है।







